जिम्बाब्वे में सेना ने बुधवार को सत्ता पर कब्जा जमा लिया. समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार सेना ने अपनी कार्रवाई का मकसद राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे के आसपास मौजूद ‘अपराधियों’ का सफाया बताया है. राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे और उनकी पत्नी के बारे में सेना ने बताया है कि वे सुरक्षित हैं. लेकिन मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि राष्ट्रपति मुगाबे और उनके परिवार को नजरबंद कर लिया गया है.

इससे पहले बुधवार सुबह राष्ट्रीय टीवी चैनल पर प्रसारित बयान में जिम्बाब्वे के मेजर जनरल एसबी मोयो ने कहा, ‘हम उनके (राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे) के आसपास मौजूद अपराधियों को निशाना बना रहे हैं, जिनके अपराध देश को सामाजिक और आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं. हम उन्हें न्याय के कटघरे में लाएंगे.’ उन्होंने आगे कहा कि जैसे ही सेना का अभियान पूरा हो जाएगा, स्थिति सामान्य हो जाएगी.

उधर, सत्ताधारी दल जेडएएनयू-पीएफ ने बीती रात राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे और उनकी पत्नी को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी है. राष्ट्रपति मुगाबे को पार्टी से हटाने की जानकारी देते हुए ट्विटर पर जेडएएनयू-पीएफ ने लिखा, ‘न तो जिम्बॉब्वे और न ही जेडएएनयू-पीएफ का नेतृत्व अब राष्ट्रपति मुगाबे और उनकी पत्नी के पास है. यह देश और संविधान की पवित्रता के लिए जरूरी कार्रवाई थी. आज से एक नया युग शुरू होता है.’ हालांकि सेना के साथ-साथ सत्ताधारी जेडएएनयू-पीएफ ने तख्तापलट से इनकार किया है.

इस बीच सूत्रों के हवाले से खबर आई है कि सेना ने जिम्बाब्वे के वित्त मंत्री इग्नाटियस चाम्बो को हिरासत में ले लिया है. इग्नाटियस चाम्बो सत्ताधारी दल जेडएएनयू-पीएफ के समूह-40 (जी-40) के प्रमुख सदस्य हैं और वे राष्ट्रपति मुगाबे के उत्तराधिकारी के तौर पर उभर रहे हैं. हालांकि, जी-40 का नेतृत्व राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे की पत्नी ग्रेस के हाथों में है. इस बीच जिम्बाब्वे के मुख्य विपक्षी दल मूवमेंट फॉर डेमोक्रेटिक चेंज ने शांतिपूर्ण तरीके से संवैधानिक लोकतंत्र की वापसी की अपील की है.