कर्नाटक में राज्य सरकार और डॉक्टरों के बीच चल रही तनातनी का ख़ामियाज़ा मरीज़ों को भुगतना पड़ रहा है. कर्नाटक निजी मेडिकल प्रतिष्ठान (संशोधन) विधेयक, 2017 (केएमपीए) को लेकर राज्य के 22 हज़ार डॉक्टर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं. इसके चलते अब तक छह मरीजों की मौत हो चुकी है. न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने बताया कि निजी मेडिकल क्लिनिकों और अस्पतालों के बंद होने की वजह से इन लोगों का इलाज नहीं हो पाया था.

सरकार द्वारा पेश किए गए संशोधन बिल में चिकित्सा प्रक्रियाओं की लागत को नियमित करने, क़ानूनी मामलों में दोषी डॉक्टरों की कारावास की सज़ा तय करने और अधिक जुर्माने व ज़िला शिकायत सेल के अलावा अन्य नियम प्रस्तावित किए गए थे. यही वजह है कि डॉक्टर इस बिल का विरोध कर रहे हैं. उनका कहना है कि सरकार उनका पक्ष सुने बिना ही निगरानी के लिए ज़िला शिकायत सेल स्थापित करना चाहती है. आईएमए के निर्वाचित अध्यक्ष डॉ रविंद्र एचएन ने सरकार के संशोधन बिल को क्रूर बताया है.

लाइवमिंट की ख़बर के मुताबिक़ गुरुवार को डॉक्टरों ने मांग की कि बिल में शामिल 14 प्रस्तावों में से चार को बिल में शामिल न किया जाए. उधर, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का कहना है कि वे एक बार फिर डॉक्टरों से बात करेंगे. इससे पहले निजी अस्पताल व नर्सिंग होम असोसिएशन के अध्यक्ष डॉ जयन्ना ने बताया कि प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने इस मामले में मुख्यमंत्री से बात की थी. उन्होंने कहा कि डॉक्टर आश्वस्त थे कि मुख्यमंत्री एक उचित और ज़िम्मेदार फ़ैसला लेंगे.