संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावती’ को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार उत्तर प्रदेश की आदित्यनाथ सरकार ने फिल्म के रिलीज होने से राज्य में कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई है. केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय को लिखे पत्र में राज्य के प्रधान सचिव (गृह) अरविंद कुमार ने कहा है कि सेंसर बोर्ड को जनता की राय को ध्यान में रखकर फैसला करना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि सेंसर बोर्ड को फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ को लेकर जनता में असंतोष के बारे में बताया जाना चाहिए.

रिपोर्ट के मुताबिक अपने पत्र में प्रधान सचिव अरविंद कुमार ने कहा है कि नौ अक्टूबर को फिल्म ‘पद्मावती’ का ट्रेलर रिलीज होने के बाद राज्य में कई संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया था. उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश में नवंबर में नगर निकाय चुनावों के लिए मतदान के बाद एक दिसंबर को मतगणना होनी है और दो दिसंबर को बारावफात भी पड़ रहा है, जिससे एक दिसंबर को फिल्म रिलीज होने पर सुरक्षा का खतरा पैदा हो सकता है. हालांकि, प्रदेश के पुलिस महानिदेशक सुलखान सिंह ने फिल्म को लेकर विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए पुलिस प्रशासन को ज्यादा सतर्क रहने का निर्देश दिया है.

उधर, करणी सेना ने एक दिसंबर को फिल्म रिलीज होने पर पूरे देश में बंद की धमकी दी है. इस बीच सेंसर बोर्ड सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी ने फिल्म को देखने की खबरों को निराधार बताया है. समाचार एजेंसी आईएएनएस के अनुसार उन्होंने कहा, ‘मैंने अभी तक फिल्म नहीं देखी है, इसलिए इसके बारे में कुछ नहीं कह सकता. फिल्म को सेंसर बोर्ड की प्रक्रिया से गुजरना होगा.’ फिल्म के निर्देशक संजय लीला भंसाली ने फिल्म फिक्शन पर आधारित बताया है. एक वीडियो संदेश में उन्होंने यह भी कहा है कि इसमें राजपूत गौरव को पूरा ध्यान में रखा गया है.