दुनियाभर में लग्जरी इलेक्ट्रिक वाहन बनाने के पहचानी जाने वाली टेस्ला ने इस गुरुवार को एक खास इलेक्ट्रिक सेमी ट्रक पेश किया है. टेस्ला के सीईओ एलन मस्क की मानें तो यह ट्रक ट्रांसफॉर्मर मूवी के ऑटोबोट्स की तरह रोबोट का रूप ले सकता है. इस ट्रक से पर्दा हटाने से पहले मस्क ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया, ‘यह केवल ट्रक नहीं है. यह एक रोबोट में बदल सकता है और एलियंस से लड़ सकता है.’ मस्क के मुताबिक टेस्ला ने इस ट्रक के लुक को इस तरह से डिजाइन किया है कि यह दिखने में बंदूक की गोली जैसा लगे.

यह इलेक्ट्रिक सेमी ट्रक एक बार पूरा चार्ज करने के बाद 800 किलोमीटर तक चल सकता है. इसके अलावा टेस्ला ने अपने ट्रक को भी वैसी ही बेहतरीन रफ़्तार देने की कोशिश की है जैसी कि कंपनी की कारों में देखने को मिलती है. बताया जा रहा है कि यह खाली ट्रक 0 से 96 किमी/घंटे की स्पीड पकड़ने में सिर्फ पांच सेकेंड का समय लेता है जबकि पूरे वजन सहित इसी रफ़्तार को पकड़ने में इसे 20 सेकेंड का समय लगता है.

खबरों के अनुसार यह ट्रक ऑटोपायलट सुविधा से भी लैस है जिसमें ऑटोमेटिक इमरजेंसी ब्रेक, ऑटोमेटिक लेन कीपिंग और लेन डिपार्चर वार्निंग जैसी सुविधाएं दी गई हैं. ऑटोविशेषज्ञों का कहना है कि तमाम खूबियों से लैस होने के बावजूद टेस्ला के इस ट्रक को टक्कर देने वाली कंपनियों की भी कमी नहीं है. इनमें दाइमलर, कमिन्स, टोयोटा और वॉल्वो प्रमुख हैं.

स्कॉर्पियो का नया अवतार

देश की प्रमुख ऑटोमोबाइल कंपनी महिंद्रा एंड महिंद्रा ने इस मंगलवार अपने लोकप्रिय एसयूवी स्कॉर्पियो का नया अवतार लॉन्च कर दिया है. जानकारों के मुताबिक स्कॉर्पियो फेसलिफ्ट का ग्राहकों द्वारा लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था. महिंद्रा ने स्कॉर्पियो फेसलिफ्ट को छह वेरिएंट- एस2, एस4, एस4+, एस6+, एस8 और एस10 के साथ बाजार में उतारा है. स्कॉर्पियो-2017 में महिंद्रा ने न सिर्फ लुक्स और इंटीरियर बल्कि परफॉर्मेंस के मामले में भी कई अहम बदलाव किए हैं जो आपको खासा प्रभावित कर सकते हैं.

यदि नई स्कॉर्पियो के लुक्स की बात करें तो महिंद्रा ने इसके फ्रंट में पहले से काफी अलग और जीप कंपस से मिलती-जुलती 7 स्लेट ग्रिल और बंपर दिया है जो इसे बिल्कुल फ्रेश अपील देते हैं. वहीं अलग लाइसेंस प्लेट और रियर बंपर के साथ दिए नए टेललैंप्स स्कॉर्पियो को पीछे से भी एक नई कार होने का फील देते हैं. यदि इस कार के केबिन की तरफ नजर डालें तो यहां कंपनी ने पहले की ही तरह लाइट और डार्क थीम को बरकरार रखा है. यहां आपको 6.0 इंच का इंफोटेंमेंट सिस्टम थोड़ा निराश जरूर कर सकता है क्योंकि सेगमेंट की कई गाड़ियों में इसकी साइज बढ़ाकर 8 इंच तक कर दी गई है.

स्कॉर्पियो फेसलिफ्ट में यदि सबसे अहम बदलाव की बात की जाए तो वह है इसका इंजन. महिंद्रा ने स्कॉर्पियो-17 में 140 पीएस की पॉवर वाला 2.2 लीटर एम-हॉक डीज़ल इंजन दिया है जो पहले वाले इंजन से 18 बीएचपी ज्यादा यानी 138 बीएचपी की अधिकतम पॉवर उत्पन्न करता है. इसे 6-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स के साथ 6-स्पीड टॉर्क कन्वर्टर ट्रांसमिशन के साथ जोड़ा गया है. बताते चलें कि यह ट्रांसमिशन और इंजन महिंद्रा की ही एक सेगमेंट ऊपर की एक्सयूवी-500 में इस्तेमाल किया जाता है.

यदि आप इस कार को खरीदने का मन बना रहे हैं तो इसके अलग-अलग मॉडल के लिए आपको 9.97 लाख रुपए से लेकर 16.01 लाख रुपए (एक्सशोरूम) कीमत चुकानी होगी. जानकारों का कहना है कि स्कॉर्पियो फेसलिफ्ट बाजार में टाटा सफारी स्टॉर्म, ह्युंडई क्रेटा और रेनो कैप्चर जैसी गाड़ियों को कड़ी टक्कर दे सकती है.

मारुति की इलेक्ट्रिक कार 2020 तक बाजार में दिख सकती है

देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति की सहयोगी कंपनी सुज़ुकी मोटर कॉर्पोरेशन ने भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल पेश करने के लिए टोयोटा मोटर कॉर्पोरेशन के साथ एक एमओयू साइन किया है. बताया जा रहा है कि इस समझौते के तहत सुज़की टोयोटा की तकनीकी मदद से भारतीय बाजार के लिए इलेक्ट्रिक कारों का निर्माण करेगी जिन्हें 2020 तक देश के बाजार में पेश किया जा सकता है. सूत्रों के मुताबिक इनमें से कई वाहन ऐसे भी होंगे जिन्हें दोनों ही कंपनियों (सुज़ुकी और टोयोटा) की तरफ से अलग-अलग नामों के साथ बाजार में उतारा जाएगा.

दोनों ही कंपनियों ने इसी साल फरवरी में साथ आने की घोषणा की थी जिसे इस समझौते के जरिए मूर्त रूप दिया गया है. खबरों के अनुसार सुज़ुकी और टोयोटा साथ मिलकर भारत में इलेक्ट्रिक कार की स्वीकार्यता की आवश्यकताओं को समझने के लिए एक साझी रिसर्च भी करने वाली हैं.

जानकारों के अनुसार सरकार की 2030 तक पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों पर निर्भर होने की नीति की घोषणा के बाद देश की लगभग सभी प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियां अपने-अपने इलेक्ट्रिक वाहन तैयार करने की दिशा में जुट गई हैं. कहा जा रहा है कि इन गाड़ियों के बाजार में आ जाने से लगातार बढ़ रही वायु प्रदूषण की समस्या से निश्चित तौर पर निजात मिलेगी. लेकिन ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञों की मानें तो तो भारत जैसे देश में जहां अभी तक हजारों गांवों तक बिजली नहीं पहुंची है, वहां इस तरह की उम्मीदें दूर की कौड़ी हैं. उनके मुताबिक सरकार की यह पहल नार्वे, नीदरलैंड और जर्मनी की महज नकल मात्र है जो बिजली जैसी मूलभूत सुविधा के क्षेत्र में भारत से कहीं आगे हैं.