प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन्मभूमि गुजरात में राहुल गांधी का ‘मोदी फॉर्मूला’ भाजपा को चिंता में डालता दिख रहा है. चुनाव जीतने के लिए जो तरीका नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश में अपनाया था ठीक वैसा ही रास्ता राहुल गांधी ने गुजरात में पकड़ा है. दोनों राज्यों में कुछ समीकरण मिलते हैं. गुजरात कांग्रेस के एक नेता कहते हैं, ‘भाजपा 14 साल तक उत्तर प्रदेश में सत्ता से दूर थी और कांग्रेस 22 साल से गुजरात में सरकार के बाहर बैठी है. उत्तर प्रदेश में भी भाजपा का संगठन कमजोर था और गुजरात में भी कांग्रेस का संगठन भाजपा की तुलना में बेजान ही दिखता है.’ वे आगे जोड़ते हैं, ‘जब गुजरात चुनाव की शुरुआती बैठक हुई थी तब तक उत्तर प्रदेश के नतीजे आ चुके थे और महीनों पहले ही गुजरात के कांग्रेस नेताओं को कहा गया था कि गुजरात चुनाव माहौल बनाकर जीतेंगे. माहौल बनाने के लिए एक बड़ा हथियार कांग्रेस एकदम आखिर वक्त में चलाएगी.’

अब यह तय हो चुका है कि बहुत जल्द राहुल गांधी कांग्रेस के अध्यक्ष बनेंगे. सुनी सुनाई से कुछ ज्यादा है कि राहुल गांधी को गुजरात चुनाव में मतदान से ठीक पहले ही अध्यक्ष बनाया जाएगा ताकि धमाका बड़ा हो. कांग्रेस के संगठन चुनाव से जुड़े नेताओं में यह बात फैली हुई है कि राहुल के खिलाफ कोई भी नेता पर्चा नहीं भरेगा. ऐसे में अध्यक्ष का चुनाव महज एक औपचारिकता रह जाएगी और निर्विरोध राहुल को अध्यक्ष बनाया जाएगा.

कांग्रेस चाहती तो यह फैसला गुजरात चुनाव के नतीजे आने के एक-दो महीने बाद भी कर सकती थी. पार्टी के कुछ बुजुर्ग नेताओं की तो यही राय थी कि नरेंद्र मोदी के अपने राज्य में चुनाव है और राहुल गांधी को इतना बड़ा जोखिम नहीं उठाना चाहिए. लेकिन राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने मन बना लिया है. अगर सोनिया गांधी की तबीयत ठीक रही और दस जनपथ से किसी तरह का संदेश नहीं आया तो नौ दिसंबर से पहले ही राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बन सकते हैं. गुजरात के एक वरिष्ठ पत्रकार कहते हैं कि 22 साल बाद पहली बार कांग्रेस गुजरात में चुनाव लड़ती दिख रही है और राहुल गांधी के प्रचार का असर भाजपा पर भी दिखने लगा है. असर भी ऐसा जिसकी खबर प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के दफ्तर तक को भेजी गई है.

अपने गुजरात दौरे में राहुल गांधी हर उस तरीके को अपना चुके हैं जो अब तक भाजपा नेता अपनाया करते थे. सुबह-सुबह मंदिर जाना, दोपहर में रैलियों में भाषण देना और शाम में सड़क पर निकल जाना, कभी चाय की दुकान पर बैठकर चाय की चुस्की लेना तो भजिया की दुकान पर भजिया खाना. भाजपा चाय पर चर्चा कर रही है तो कांग्रेस के पास काफी विद कांग्रेस कार्यक्रम है. अपने दौरे के आखिरी चरण में राहुल कुछ दिन पहले जब मेहसाणा पहुंचे तो उनसे मिलने के लिए सड़क पर ऐसी भीड़ जुटी जिसका अंदाज़ा कांग्रेस नेताओं को भी नहीं था. इस भीड़ को देखकर राहुल गांधी भी पूरे उत्साह में थे और कांग्रेस के कार्यकर्ता भी.

मेहसाणा गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल का इलाका है. सुनी सुनाई से कुछ ज्यादा है कि मेहसाणा में जो हुआ उसकी रिपोर्ट अमित शाह ने पार्टी के जिलाअध्यक्ष से मांगी है. मेहसाणा के विधायकों की खिंचाई हुई है. संघ के नेता भी इससे चौंक गए थे. इसलिए संघ भी अपने स्तर पर मेहसाणा में बदले हालात की छानबीन कर रहा है.

सबसे ज्यादा अचंभे की बात यह है कि जब राहुल का मेहसाणा के लोगों के बीच घिरे होने का वीडियो वायरल हुआ तो खुद प्रधानमंत्री के स्तर पर गुजरात के नेताओं से बातचीत हुई. प्रधानमंत्री कार्यालय के एक करीबी के मुताबिक हर स्तर पर प्रधानमंत्री गुजरात की ज़मीनी हकीकत जानना चाहते हैं. संघ से आई रिपोर्ट अच्छी नहीं है, लेकिन भाजपा के सांसद, मंत्री और प्रदेश पदाधिकारी ये मानने के लिए तैयार नहीं हैं कि उनका जनाधार खिसका है. मेहसाणा भाजपा का गढ़ माना जाता था. जब पूरे गुजरात में कांग्रेस की आंधी चलती थी तब भी मेहसाणा की सीट भाजपा ने जीती है. यहां से लगातार भाजपा के सांसद और विधायक जीतते आए हैं. लेकिन ऐसी जगह पर जब राहुल को देखने हजारों लोग आएं तो चिंता सिर्फ अहमदाबाद में नहीं दिल्ली में भी होगी.

गुजरात में भाजपा से करीबी रखने वाले एक पत्रकार कहते हैं, ‘22 साल में पहली बार पटेल समुदाय का वोट आधा-आधा बंट गया है. कुछ इलाकों में तो पटेल पूरी तरह भाजपा के खिलाफ हैं. मेहसाणा की भीड़ भी उसी बदले वोट बैंक का प्रतीक है. अगर सिर्फ इतना होता तो भाजपा के लिए चिंता की बात होती. लेकिन एक और बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. पहली बार भाजपा के खिलाफ जातियों का गठजोड़ खड़ा हो रहा है. युवा भाजपा से नाराज़ हैं. हार्दिक पटेल की सीडी लीक करने से नुकसान ज्यादा और फायदा कम हुआ’.