केन्‍द्र सरकार संसद के अगले सत्र में तीन तलाक की प्रथा पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानून बनाने जा रही है. दिसंबर में संभावित संसद के शीतकालीन सत्र में इसके लिए एक विधेयक लाया जा सकता है. मोदी सरकार ने पहले ही इस पर विचार के लिए मंत्रियों का एक समूह बना दिया है. इस बीच सरकारी सूत्रों ने दावा किया है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी तीन तलाक दिए जाने के मामले संज्ञान में आए हैं.

मुस्लिम समाज में प्रचलित इस परंपरा के तहत कोई पति एक साथ तीन बार ‘तलाक’ बोलकर अपनी पत्नी को तलाक दे सकता है. बीते सालों में ऐसे भी मामले आए हैं जब मुस्लिम महिलाओं को पत्र, फोन या वॉट्सएप के जरिए तलाक दिया गया है. तीन तलाक ऐसी और दूसरी घटनाओं को देखते हुए कई मुस्लिम महिलाओं ने इस परंपरा को देश की शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी. अदालत ने इस पर सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा था कि यह प्रथा महिलाओं के समानता के अधिकार का उल्लंघन करती है और इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने बीते अगस्त में तीन तलाक की प्रथा को असंवैधानिक करा दे दिया था.

दुनिया के ज्यादातर देश तीन तलाक को मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ मानते हुए इस पर पहले ही प्रतिबंध लगा चुके हैं. पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे मुस्लिम देशों में भी इस पर रोक है. चूंकि भारत में विभिन्न धर्मों के मानने वालों के निजी जीवन को नियंत्रित करने वाले कानून अलग-अलग हैं इसलिए यहां मुस्लिमों समुदाय में यह रिवाज अभी तक प्रचलित है.

दूसरी ओर अभी तक यह तय नहीं है कि इस बार संसद का शीतकालीन सत्र कब बुलाया जाएगा. हालांकि अभी तक इस सत्र को नवंबर के मध्य तक शुरू करने की परंपरा थी. विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार गुजरात चुनाव के चलते इसे बुलाने में देर कर रही है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मोदी सरकार के ज्यादातर मंत्री गुजरात के चुनाव में व्यस्त हैं और यही वजह है कि अब सत्र को दिसंबर के मध्य में बुलाए जाने की संभावना है. केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को कहा भी है कि कि सरकार जल्द ही इसकी तारीखों की घोषणा कर देगी.