सुप्रीम कोर्ट ने घर खरीदारों के बकाया 2000 करोड़ रुपये लौटाने में आनाकानी कर रहे जेपी इन्फ्राटेक को सख्त हिदायत दी है. द इकनॉमिक टाइम्स के अनुसार बुधवार को अदालत में पेश जेपी इंफ्राटेक के निदेशकों से चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा, ‘अच्छे बच्चों की तरह पैसे जमा कर दें.’ अदालत ने आगे कहा, ‘खरीदारों को उनके पैसे वापस मिलने चाहिए. मध्यम वर्गीय ग्राहकों की जिंदगी भर की कमाई को बर्बाद न करें. आप अपने परिवार के जेवरात को गिरवीं रखें या बेंच दे, लेकिन पैसा लौटा दें.’ कंपनी के प्रवर्तकों और निदेशकों की संपत्ति पर रोक लगाते हुए अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि अगर किसी ने अपनी या अपने करीबी परिजनों की संपत्ति को अलग करने की कोशिश की तो उसे अदालत की अवमानना और आपराधिक मुकदमों का सामना करना पड़ेगा.

रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने जेपी इंफ्राटेक को 275 करोड़ रुपये जमा कराने की इजाजत देने के साथ 31 दिसंबर तक 275 करोड़ रुपये और जमा कराने का निर्देश दिया. हालांकि, बाकी के 1450 करोड़ रुपये जमा करने की कोई समय सीमा नहीं तय की. वहीं, अदालत में पेश अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने दावा किया कि कंपनी ने ग्राहकों के पैसों को इधर-उधर कर दिया है, इसलिए इसके बही-खातों की जांच कराने की जरूरत है. इस मामले में अगली सुनवाई 10 जनवरी को होगी.

यह पूरा विवाद जेपी इन्फ्राटेक के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू होने के बाद सामने आया. इससे दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में जेपी इन्फ्राटेक की आवासीय परियोजनाओं में घर खरीदने वाले 32 ​हजार परिवारों का घर पाने का सपना में अधर में लटक गया है. घर खरीदारों ने जनहित याचिका के जरिए जेपी इंफ्राटेक के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने के नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (एनसीएलटी) के फैसले और इन्सॉल्वेंसी व बैंकरप्सी कोड-2016 की धारा-14 को चुनौती दी है. धारा-14 घर खरीदारों को जेपी इन्फ्राटेक को उपभोक्ता अदालत में चुनौती देने से रोकती है.