आवाज से तीन गुना ज्यादा तेज रफ्तार से उड़ान भरने वाली ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल का सुखोई-30एमकेआई लड़ाकू विमान से परीक्षण सफल रहा है. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक बुधवार को इस मिसाइल को पहली बार किसी लड़ाकू विमान से दागा गया. रक्षा मंत्रालय ने इसकी सफलता को भारतीय वायु सेना की क्षमता में इजाफा करने वाला बताया है.

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक सुखोई-30 लड़ाकू विमान से दागी गई ब्रह्मोस का वजन 2.5 टन था. यह सुखोई-30 लड़ाकू विमान पर लगाया गया अब तक का सबसे भारी हथियार भी था. ब्रह्मोस ने बंगाल की खाड़ी में मौजूद लक्ष्य पर निशाना लगाया. इस सफल परीक्षण के साथ भारत ब्रह्मोस मिसाइल को जमीन, हवा और समुद्र तीनों जगहों से दागने में सक्षम हो गया है. रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए ब्रह्मोस टीम और रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) को बधाई दी है.

ब्रह्मोस भारत के डीआरडीओ और रूस के रक्षा संगठन एनपीओएम की साझेदारी में विकसित किया गया है. इसका नाम भारत की ब्रह्मपुत्र और रूस की मास्को नदी के नाम को मिलाकर रखा गया है. द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक रक्षा मंत्रालय के अधिकारी ने कहा, ‘ब्रह्मोस मिसाइल को 3,200 किमी तक उड़ान भरने में सक्षम लड़ाकू विमान के बाद एक घातक विकल्प तैयार होने की उम्मीद है.’