केंद्र सरकार ने बुधवार को 15वें वित्त आयोग के गठन को​ मंजूरी दे दी है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक के बाद जानकारी दी है कि आयोग को एक अप्रैल, 2020 से पहले अपनी सिफारिशें दे देनी होगी ताकि वे वित्त वर्ष 2020-21 से लागू की जा सकें. उन्होंने यह भी बताया कि आयोग के अध्यक्ष, सदस्यों और विचाराधीन मुद्दों का निर्धारण जल्द ही किया जाएगा. आयोग का काम 2020 से 2025 तक के आर्थिक संसाधनों का अनुमान लगाना और राज्यों के बीच राजस्व के बंटवारे का ‘फॉर्मूला’ तय करना होता है. इसके हिसाब से ही केंद्र और राज्यों के बीच राजस्व का बंटवारा होता है.

जानकारों के अनुसार इस साल जुलाई से वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) लागू होने के बाद आयोग का काम और जिम्मेदारियां बहुत बढ़ गई हैं. इस आयोग को यह नई कर प्रणाली लागू होने के बाद भविष्य में मिलने वाले राजस्व का अनुमान लगाना है. हालांकि राज्यों को पहले से ज्यादा राजस्व मिलने की संभावना के बारे में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि इसका निर्धारण करना सरकार नहीं, आयोग का काम है. नए वित्त आयोग का अध्यक्ष कौन होगा, यह पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि जल्द ही सबको इसका पता चल जाएगा. उन्होंने यह जिक्र भी किया कि वित्त आयोग को अपनी रिपोर्ट सौंपने में अमूमन दो साल लगते हैं.

वित्त आयोग एक संवैधानिक संस्था है. हर पांच साल बाद बनने वाली इस संस्था का जिक्र संविधान के अनुच्छेद 280 में है. आयोग केंद्र से राज्यों को मिलने वाले अनुदान के नियम भी तय करता है. फिलहाल केंद्र और राज्यों के बीच राजस्व का वितरण 14वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार हो रहा है. 14वें वित्त आयोग के अध्यक्ष आरबीआई के पूर्व गवर्नर वाईवी रेड्डी थे. इसके मुताबिक केंद्र सरकार फिलहाल कुल राजस्व का 42 फीसदी राज्यों को देता है.