पिछले कई महीनों से जारी रोहिंग्या संकट को सुलझाने के लिए बुधवार को बांग्लादेश और म्यांमार के बीच बातचीत शुरू हो गई है. बांग्लादेश अपने यहां शरणार्थी शिविरों में रह रहे करीब छह लाख रोहिंग्या मुसलमानों को तय समयसीमा में वापस लेने की मांग म्यांमार से कर रहा है.

इस मसले पर म्यांमार की राजधानी नैपीडॉ में आज दोनों देशों के विदेश सचिवों के बीच बातचीत हुई है. गुरुवार को बांग्लादेश के विदेश मंत्री एच महमूद अली म्यांमार की नेता और विदेश मामलों की प्रभारी आंग सान सू की से बात करेंगे. इससे पहले बांग्लादेश ने चीन से भी म्यांमार पर दबाव बनाने की मांग की थी. संयुक्त राष्ट्र संघ भी चाहता है कि इस मसले का समाधान दोनों देशों के बीच बातचीत से निकाला जाए. जानकारों का मानना है कि चीन, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा बनाए गए दबाव के बाद ही यह बातचीत शुरू हो सकी है.

इस बीच बांग्लादेश ने बताया है कि आज की इस बातचीत के दौरान दोनों देशों ने मसले का हल निकालने के लिए छह-छह प्रस्ताव एक-दूसरे को सौंपे हैं. बांग्लादेश के अनुसार उसकी कोशिश है कि इस मसले को हल करने के लिए एक तय समय सीमा पर कोई समझौता हो जाए. बांग्लादेश ने यह भी बताया कि दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर असहमति है जिसे दूर करने की कोशिश हो रही है.

यह संकट इस साल अगस्त में तब शुरू हुआ था जब म्यांमार के रखाइन प्रांत में रोहिंग्या चरमपंथियों ने पुलिस की कई चौकियों पर हमला किया था. इसके बाद म्यांमार के सुरक्षाबलों ने चरमपंथियों के खिलाफ अभियान चलाया लेकिन इस दौरान कथिततौर पर उसने कई निर्दोषों को भी प्रताड़ित किया और रोहिंग्याओं के गांव के गांव जला दिए. इन घटनाओं के बाद रखाइन से बड़ी संख्या में रोहिंग्या मुसलमानों का पलायन शुरू हो गया और इनमें से ज्यादातर बांग्लादेश में बने अस्थायी शिविरों में रह रहे हैं.