अगले साल होने वाली जेईई (संयुक्त प्रवेश परीक्षा)- मेन के लिए छात्राें के पास हिंदी, अंग्रेजी के अलावा सिर्फ़ गुजराती का ही विकल्प उपलब्ध होगा. द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सीबीएसई (केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा मंडल) ने इसी 20 नवंबर को जारी परीक्षा कार्यक्रम में इसका उल्लेख किया है. हालांकि इसके साथ इस व्यवस्था पर सवाल भी उठने लगे हैं क्योंकि देश की तमाम क्षेत्रीय भाषाओं में से सिर्फ़ गुजराती को तरज़ीह दी गई है.

सीबीएसई की ओर से जारी परीक्षा कार्यक्रम में स्पष्ट उल्लेख है कि 2018 में जेईई-मेन में हिस्सा लेने वाले छात्र-छात्राएं हिंदी और अंग्रेजी के अलावा गुजराती भाषा में परीक्षा दे सकते हैं. खास तौर पर गुजरात और उसके नज़दीकी दमन-दीव तथा दादरा-नागर हवेली के विद्यार्थी. इस बाबत अख़बार ने जब सीबीएसई से संपर्क किया तो वहां के सूत्रों ने बताया, ‘गुजरात की सरकार ने सबसे पहले 2013 में गुजराती भाषी विद्यार्थियों के लिए यह भाषायी विकल्प उपलब्ध कराने का आग्रह किया था. उसके आग्रह पर तभी से लगातार यह व्यवस्था जारी है.’

हालांकि तमिलनाडु जैसे राज्यों के कई सामाजिक कार्यकर्ता इसे भेदभावपूर्ण मानते हैं. शिक्षा के क्षेत्र में काम करने वाले ऐसे ही कार्यकर्ता गजेंद्र बाबू कहते हैं, ‘सीबीएसई का यह कदम संविधान की ओर से मिले समानता के अधिकार के विरुद्ध है. देश में 22 अधिकृत भाषाएं हैं. अगर गुजराती भाषा में परीक्षा की सुविधा दी जा सकती है तो अन्य भाषाओं में भी होनी चाहिए.’ ग़ौरतलब है कि देश के सभी एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) और आईआईआईटी (भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान) में जेईई-मेन के जरिए प्रवेश मिलता है. इस परीक्षा के जरिए जेईई-एडवांस के लिए पात्र विद्यार्थियों का भी चयन होता है जिसके मार्फ़त सभी आईआईटी (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) में प्रवेश दिया जाता है.