क्यों अंगेला मेर्कल अब तक की सबसे बड़ी राजनीतिक मुश्किल में फंसती दिखाई दे रही हैं? | सोमवार, 20 नवंबर 2017

जर्मनी की चांसलर अंगेला मेर्कल अब तक की सबसे बड़ी राजनीतिक मुश्किल में फंसती दिखाई दे रही हैं. सीएनएन के अनुसार उनके नेतृत्व में गठबंधन सरकार बनाने के लिए चल रही वार्ता विफल हो गई है. सोमवार को चांसलर अंगेला मेर्कल ने बताया कि फ्री डेमोक्रेटिक पार्टी (एफडीपी) उनकी पार्टी क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) के साथ जारी गठबंधन की बातचीत से अलग हो गई है. उन्होंने कहा, ‘चांसलर के रूप में...मैं देश को इस मुश्किल समय से बाहर निकालने के लिए सब कुछ करूंगी.’

जर्मनी में सितंबर में आम चुनाव हुए थे, जिसमें अंगेला मेर्कल की पार्टी सीडीयू को 65 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा था. इसी वजह से सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद वह सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत से चूक गई थी. इसके बाद गठबंधन सरकार ही एकमात्र विकल्प बचा था. हालांकि, गठबंधन सरकार के लिए शरण, कर और पर्यावरण नीतियों को लेकर कई हफ्तों से जारी विवादित बातचीत से रविवार को एफडीपी अप्रत्याशित रूप से अलग हो गई. खबरों के मुताबिक इन मुद्दों पर गठबंधन के लिए चर्चा कर रहे दलों के बीच काफी मतभेद था.

अगले साल दुनिया में विनाशकारी भूकंप आ सकते हैं : रिपोर्ट | मंगलवार, 21 नवंबर 2017

2018 दुनिया के लिए बड़े भूकंपों का साल हो सकता है. फोर्ब्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक ऐसा उस विशेष परिघटना की वजह से हो सकता है जिसके चलते एक नियमित अंतराल के बाद हमारी धरती के घूमने की रफ्तार कुछ समय के लिए जरा सी घट जाती है और उसके बाद फिर बढ़कर सामान्य हो जाती है. वैज्ञानिक बताते हैं कि सामान्य लोग यह कमी कभी महसूस नहीं कर सकते, लेकिन इसके नतीजे वे हमेशा देख सकते हैं जो बड़े भूकंपों के रूप में सामने आते हैं.

भूवैज्ञानिक पृथ्वी की गति में होने वाले मिलीसेकेंड के परिवर्तन को भी माप सकते हैं. अब उनका मानना है कि गति में होने वाली यह कमी ही एक निश्चित अंतराल के बाद आने वाले बड़े भूकंपों के लिए जिम्मेदार है. भूवैज्ञानिकों की एक शोध टीम ने 1900 के बाद आए ऐसे हर भूकंप का विश्लेषण किया जिसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर सात से ज्यादा थी. उन्होंने पाया कि करीब हर 32 साल के अंतराल पर दुनिया भर में भूकंपों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हो रही थी. इस बात ने उन्हें हैरान कर दिया. उन्होंने और गहन पड़ताल की तो पता चला कि यह बढ़ोतरी उसी दौरान हुई है जब धरती के घूमने की रफ्तार में कमी आई थी. वैज्ञानिकों ने पाया कि हर 25-30 साल बाद यह रफ्तार कम हुई और इसके तुरंत बाद भूकंपों की संख्या बढ़ गई.

पाकिस्तान : मुंबई हमलों के साजिशकर्ता हाफिज सईद की नजरबंदी खत्म| बुधवार, 22 नवंबर 2017

मुंबई आतंकी हमले का मुख्य साजिशकर्ता हाफिज सईद नजरबंदी से आजाद हो गया है. अंग्रेजी अखबार द हिंदू के मुताबिक बुधवार को लाहौर हाई कोर्ट के न्यायिक समीक्षा बोर्ड ने हाफिज सईद की नजरबंदी तीन महीने के लिए बढ़ाने के सरकार के अनुरोध को खारिज कर दिया. लाहौर सरकार की दलील थी कि अगर जमात-उद-दावा (जेयूडी) प्रमुख हाफिज सईद को रिहा किया जा जाता है तो पाकिस्तान पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लग जाएगा.

संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका और भारत द्वारा आतंकी घोषित हाफिज सईद को जस्टिस यावर अली की अध्यक्षता वाले समीक्षा बोर्ड के सामने पेश किया गया. सुनवाई के बाद बोर्ड ने कहा, ‘आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के नाम पर न्याय की परिकल्पना को प्रताड़ित और आतंकित नहीं किया जा सकता है.’ इसके साथ अदालत ने यह भी कहा कि हाफिज सईद अगर किसी दूसरे मामले में वांछित नहीं हैं तो उसे रिहा कर दिया जाना चाहिए. खबरों के मुताबिक हाफिज सईद को गुरुवार को रिहा किया जा सकता है.

रोहिंग्या शरणार्थियों की वापसी के लिए बांग्लादेश और म्यांमार के बीच समझौता | गुरुवार, 23 नवंबर 2017

बांग्लादेश ने रोहिंग्या मुसलमानों को वापस लौटने की अनुमति देने के लिए म्यांमार के साथ एक समझौता किया है. बीबीसी के मुताबिक म्यांमार की राजधानी नैपीडॉ में दोनों देशों के अधिकारियों ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए. म्यांमार के श्रम, आप्रवासन और जनसंख्या मंत्रालय के स्थायी सचिव मिंत क्यायिंग ने कहा, ‘बांग्लादेश द्वारा शरणार्थियों को लौटाने का फॉर्म सौंपे जाने के बाद हम जल्द से जल्द इन्हें वापस लेने के लिए तैयार हैं.’ उधर, बांग्लादेश ने शरणार्थी संकट सुलझाने की दिशा में इसे ‘पहला कदम’ बताया है.

हालांकि, बांग्लादेश और म्यांमार के बीच हुए इस समझौते की अभी बहुत कम जानकारी सामने आ पाई है. लेकिन शरणार्थियों की सहायता के लिए काम करने वाली एजेंसियों ने रोहिंग्या शरणार्थियों को जबरदस्ती म्यांमार भेजने पर उनकी सुरक्षा पर चिंता जताई है. एक दिन पहले ही अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने म्यांमार सेना द्वारा अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ की जा रही कार्रवाई को ‘जातीय सफाया’ बताया था. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका हिंसा करने वालों पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है.

एमरसन नेंगाग्वा जिम्बाब्वे के नए राष्ट्रपति बने | शुक्रवार, 24 नवंबर 2017

जिम्बाब्वे में राजनीतिक उथल-पुथल के बाद पूर्व उपराष्ट्रपति एमरसन नेंगाग्वा राष्ट्रपति बन गए हैं. उन्होंने शुक्रवार को राजधानी हरारे के नेशनल स्पोर्ट्स स्टेडियम में राष्ट्रपति पद की शपथ ली. एमरसन नेंगाग्वा नवंबर में अपनी जान का खतरा बताकर देश से भाग गए थे. हालांकि, इसी हफ्ते सत्ताधारी पार्टी जिम्बाब्वे अफ्रीकन नेशनल यूनियन-पैट्रियॉटिक फ्रंट (जेडएएनयू-पीएफ) ने उन्हें अपना नेता चुन लिया था. इसके साथ उनके राष्ट्रपति बनने का रास्ता साफ हो गया था.

बीते हफ्ते राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे ने उपराष्ट्रपति एमरसन नेंगाग्वा को बर्खास्त कर दिया था. लेकिन इसके बाद जिम्बाब्वे की सेना ने कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय प्रसारक के मुख्यालय को कब्जे में ले लिया था और राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे व उनके परिवार को घर में नजरबंद कर दिया था. अगले दिन सत्ताधारी दल जेडएएनयू-पीएफ ने राष्ट्रपति रॉबर्ट मुगाबे को पार्टी से निकाल दिया था. पार्टी ने रॉबर्ट मुगाबे से राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने की मांग की थी लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया था. हालांकि, महाभियोग की कार्यवाही शुरू होने के बाद 21 नवंबर को रॉबर्ट मुगाबे ने इस्तीफा दे दिया था.

पाकिस्तान : 18 दिन से इस्लामाबाद में अफरा-तफरी फैला रहे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू | शनिवार, 25 नवंबर 2017

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद का आम जनजीवन प्रभावित करने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है. स्थानीय अखबार डॉन के अनुसार धार्मिक संगठनों के समर्थक बीते 18 दिन से इस्लामाबाद और रावलपिंडी को जोड़ने वाले फैजाबाद पुल को कब्जे में लेकर प्रदर्शन कर रहे थे. प्रदर्शनकारियों के साथ कई दौर की बातचीत बेनतीजा रहने के बाद प्रशासन ने उन्हें के लिए शनिवार सुबह सात बजे तक का समय दिया था. हालांकि, समय सीमा खत्म होने पर भी वे नहीं हटे थे.

रिपोर्ट के मुताबिक यह चुनाव कानून-2017 में ‘खत्म-ए-नबुव्वत’ शपथ (नामांकन पत्र के साथ जमा होने वाला ईश्वर के नाम पर लिया गया शपथ पत्र) में बदलाव को लेकर था. धार्मिक संगठनों का मानना है कि इसमें साजिश के तहत गड़बड़ी की गई थी. हालांकि, इसे लेखकीय चूक माना गया था और सरकार ने कानून लाकर इस गलती को सुधार दिया था. लेकिन प्रदर्शनकारी कानून मंत्री जाहिद हामिद के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं. इस दौरान सरकार के साथ-साथ सुप्रीम कोर्ट और इस्लामाबाद हाई कोर्ट ने प्रदर्शनकारियों से धरना बंद करने की अपील की थी, जिसे उन्होंने अनसुना कर दिया था.