कांग्रेस ने राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने की दिशा में औपचारिक तौर पर कदम आगे बढ़ा दिए हैं. पार्टी ने अध्यक्ष पद के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू कर दी है. यह पूरी प्रक्रिया 19 दिसंबर तक पूरी होनी है. लेकिन माना जा रहा है कि राहुल गांधी के अलावा और कोई अध्यक्ष पद के लिए नामांकन नहीं करेगा, इसलिए मोटे तौर पर चुनाव औपचारिकता ही होगा. नामांकन भरने की आखिरी तारीख चार दिसंबर है. अगर उस दिन तक राहुल गांधी के अलावा और किसी ने नामांकन नहीं दाखिल किया तो यह बिल्कुल तय हो जाएगा कि बगैर किसी चुनाव के ही राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष बन जाएंगे.

अब सवाल उठता है कि आखिर अभी ही क्यों राहुल गांधी को कांग्रेस की कमान सौंपी जा रही है. पिछले कई सालों से इस तरह की अफवाह उड़ती रही है और अंत में इनमें कोई दम नहीं निकला. लेकिन इस बार औपचारिक तरीके से पूरी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. राहुल की ताजपोशी की मोटे तौर पर पांच वजहें समझ में आ रही हैंः

सोनिया गांधी की लगातार बिगड़ती सेहत

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की सेहत ठीक नहीं बताई जा रही है. यह बात सही इसलिए भी लगती है कि राजनीतिक तौर पर अब वे काफी कम सक्रिय हैं. पिछले दिनों हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव थे. सोनिया गांधी वहीं थीं लेकिन उन्होंने पार्टी के लिए न तो कोई सभा की और न ही किसी और गतिविधि में हिस्सा लिया. प्रदेश के पार्टी नेताओं को सोनिया गांधी के हिमाचल प्रदेश में होने की जानकारी तब मिली जब सोनिया गांधी की तबीयत खराब हुई और उन्हें इलाज के लिए दिल्ली लाया गया. पिछले एक-डेढ़ साल में उन्होंने कई विदेश यात्राएं की हैं. कहा जा रहा है कि इनमें से कई यात्राएं इलाज के लिए थीं. खराब सेहत की वजह से सोनिया गांधी कम सक्रिय हैं और पार्टी का काम ठीक से देख नहीं पा रही हैं. इसलिए ऐसे समय में जब लोकसभा चुनावों में डेढ़ साल से भी कम का वक्त बचा है तो कांग्रेस को एक सक्रिय अध्यक्ष की जरूरत है.

राहुल का उभार

पिछले कुछ महीनों में राहुल गांधी एक नई ऊर्जा के साथ लोगों से संवाद करते दिख रहे हैं. सोशल मीडिया पर उनकी लोकप्रियता बढ़ी है. उनकी सभाओं में लोग आ रहे हैं. वे जो बयान दे रहे हैं, उन्हें मीडिया और आम लोग तरजीह दे रहे हैं. कुल मिलाकर देखा जाए तो राहुल गांधी को लेकर नकारात्मकता का जो माहौल था, वह बदल रहा है. अब उनके प्रति लोगों में एक सकारात्मक माहौल बन रहा है. ऐसे में सोनिया गांधी और पार्टी के दूसरे प्रमुख नेताओं को यह वक्त राहुल गांधी के प्रमोशन के लिए सबसे मुफीद लग रहा है.

गुजरात में कांग्रेस की मजबूती

इस बार के गुजरात विधानसभा चुनावों में कांग्रेस मजबूती के साथ भारतीय जनता पार्टी का मुकाबला करते दिख रही है. 2012 के विधानसभा चुनावों तक कांग्रेस वहां चुनाव खानापूर्ति के लिए लड़ते हुई दिखती थी. लेकिन इस बार पार्टी बेहद उत्साहित है. खुद राहुल गांधी गुजरात में काफी वक्त दे रहे हैं. ऐसे में कांग्रेस के शीर्ष रणनीतिकारों को यह लगता है कि गुजरात में कांग्रेस की स्थिति पहले के मुकाबले ठीक ही होगी. ऐसे में अगर राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने का निर्णय होता है तो गुजरात में पार्टी को मिले फायदे का श्रेय राहुल गांधी को दिया जा सकता है. साथ ही इससे दूसरे राज्यों के कांग्रेस कार्यकर्ताओं का भी राहुल गांधी के नेतृत्व में विश्वास बढ़ेगा.

मोदी सरकार का गिरता ग्राफ

नोटबंदी और वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी के बाद नरेंद्र मोदी सरकार की लोगों के बीच आलोचना बढ़ी है. अर्थव्यवस्था के संकेतकों जैसे जीडीपी और औद्योगिक उत्पादन के खराब आंकड़ों ने भी लोगों को सरकार के कामकाज पर सवाल उठाने का मौका दिया है. इसके अलावा बेरोजगारी की समस्या जस की तस है. दूसरे भी कई मुद्दे इस सरकार के खिलाफ और भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के सिर उठाते दिख रहे हैं.

कुल मिलाकर यह स्थिति बनती दिख रही है कि नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के सबसे चुनौतीपूर्ण दौर में हैं. माना जा रहा है कि आम लोगों पर उनकी पकड़ ढीली हो रही है. ऐसे में कांग्रेस इस स्थिति का राजनीतिक फायदा उठाने की रणनीति पर काम कर रही है. राहुल गांधी ने पिछले कुछ महीनों में मोदी सरकार के खिलाफ ऊपर जिक्र किए गए मुद्दों का इस्तेमाल किया है. पार्टी को लगता है कि बतौर अध्यक्ष राहुल गांधी इन मुद्दों पर और बेहतर तरीके से राजनीतिक बढ़त ले सकते हैं.

आम चुनावों में काफी कम वक्त

2019 के लोकसभा चुनावों में अब डेढ़ साल से भी कम का वक्त बचा है. अभी भी भाजपा की जो स्थिति है उसे देखते हुए नरेंद्र मोदी को अगले आम चुनावों में रोकने के लिए कांग्रेस को एक सक्रिय अध्यक्ष चाहिए. वह अध्यक्ष ऐसा होना चाहिए जो सबके लिए स्वीकार्य हो. सोनिया गांधी की खराब सेहत के बाद ऐसे विकल्प के तौर पर कांग्रेस में सिर्फ राहुल गांधी ही दिखते हैं. इसलिए भी सोनिया गांधी और पार्टी के शीर्ष रणनीतिकारों को यह लगता है कि यह राहुल की ताजपोशी के लिए सबसे अनुकूल वक्त है.

यह कांग्रेस को भी मालूम है कि वह 2019 में नरेंद्र मोदी का रथ अकेले नहीं रोक सकती. मोदी को रोकने के लिए उसे राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावी गठबंधन बनाना होगा. गठबंधन तैयार करने की प्रक्रिया में पर्दे के पीछे कई तरह की बातचीत होती है. कहा जा रहा है कि सोनिया गांधी इस प्रक्रिया को अंजाम देने की स्थिति में नहीं हैं. ऐसे में अगर राहुल को यह काम करना है तो उन्हें बतौर अध्यक्ष पर्याप्त वक्त देना होगा.

भाजपा को हराने के लिए विपक्ष को गठबंधन के अलावा एक एजेंडा भी तैयार करना होगा. इस एजेंडे में भी राहुल गांधी की बतौर कांग्रेस अध्यक्ष सबसे अहम भूमिका होगी. 2019 के चुनावों में पूरे विपक्ष का एक एजेंडा हो, यह तय करने के लिहाज से भी अब बहुत ज्यादा वक्त नहीं बचा है. इसलिए भी राहुल गांधी को इस वक्त कांग्रेस अध्यक्ष बनाने का निर्णय लिया गया है.