अमेरिकी नागरिकता हासिल करने में भारतीय दूसरे स्थान पर हैं. अमेरिका के होमलैंड सुरक्षा विभाग (डीएचएस) द्वारा जारी किए गए इस साल के डेटा से पता चलता है कि इस मामले में केवल मैक्सिको ही भारत से आगे है. टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक़ अमेरिका की सरकार ने एक अक्टूबर 2015 से 30 सितंबर 2016 के बीच कुल 46, 100 भारतीयों को अमेरिकी नागरिकता दी है. रिपोर्ट के मुताबिक़ कुल 7.53 लाख लोगों को नागरिकता दी गई जिसमें भारतीयों की संख्या छह प्रतिशत है.

अमेरिकी नागरिकता हासिल करने की कोशिशों में उछाल देखने को मिल रहा है. इस साल नौ लाख 70 हज़ार से ज़्यादा लोगों ने इसके लिए आवदेन किया है. पिछले साल के मुक़ाबले यह 24 प्रतिशत ज़्यादा है. ‘न्यू अमेरिकन्स’ नाम की एक रिपोर्ट बताती है कि जून 2017 तक अमेरिकी नागरिकता के लिए सात लाख से ज़्यादा लोगों के आवेदन विचाराधीन थे. दो साल पहले इनकी संख्या चार लाख थी.

अमेरिका में आम तौर पर ग्रीन कार्ड हासिल कर चुके लोग ही नागरिकता के लिए आवेदन कर सकते हैं. ग्रीनकार्ड एक तरह का परमिट है जिसके बाद बाहर का कोई व्यक्ति अमेरिका मे लंबे समय तक रहकर काम कर सकता है. लेकिन ट्रंप प्रशासन की अमेरिकियों को रोजगार में प्राथमिकता देने की नीति के चलते ग्रीन कार्ड ले चुके दूसरे देशों के नागरिक अब यहीं की नागरिकता लेने की कोशिश में लगे हुए हैं.

एशियन अमेरिकन्स अडवांसिंग जस्टिस एक गैर-लाभकारी संगठन है. इसके अध्यक्ष जॉन सी यांग बताते हैं कि अमेरिका की नागरिकता की क़ीमत को सबसे ज़्यादा भारतीय समझते हैं. जॉन का कहना है, ‘यहां की नागरिकता मिलने के बाद कुछ निश्चित बुनियादी अधिकार मिल जाते हैं जिनमें वोट देने का अधिकार भी शामिल है. इसी के चलते लोग यहां कि नागरिकता चाहते हैं.’