हिंद महासागर में चीन के बढ़ते हस्तक्षेप से निपटने के लिए भारत सरकार ने छह परमाणु पनडुब्बियां बनाने की इजाजत दे दी है. नौ सेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने शु्क्रवार को बताया कि इस परियोजना पर काम शुरू हो गया है. हालांकि उन्होंने इसके बारे में ज्यादा जानकारी देने से इनकार कर दिया. फिलहाल भारत के पास आईएनएस चक्र और आईएनएस अरिहंत नाम की केवल दो परमाणु पनडुब्बियां हैं.

एडमिरल सुनील लांबा ने समुद्री डकैती रोकने के नाम पर हिंद महासागर में चीनी पनडुब्बियों की गश्त को भारत की सुरक्षा के लिए खतरा करार दिया है. नौ सेना प्रमुख ने आज दिल्ली में कहा कि पिछले चार साल से चीनी पनडुब्बियां हर साल दो बार इस इलाके में आ रही हैं. उन्होंने आने वाले वक्त में पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह पर चीनी नौसैनिक जहाज आने की आशंका भी व्यक्त की. लाम्बा के मुताबिक इन दोनों वजहों से भारत के लिए परमाणु पनडुब्बियां विकसित करना जरूरी है.

हिंद महासागर में अपना दबदबा बनाए रखने के लिए अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ ‘चार पक्षों का गठजोड़’ बनाने की भारत की कोशिश पर एडमिरल लांबा ने कहा कि इस दिशा में काम किया जा रहा है. लेकिन उन्होंने कहा कि यह वक्त ही बताएगा कि यह गठजोड़ किस तरह आकार लेता है.