अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूसी दख़लंदाज़ी के मसले पर डोनाल्ड ट्रंप की परेशानी बढ़ती दिख रही है. ऐसा इसलिए क्योंकि उनके सहयोगी और देश के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइकल टी फ़्लिन रूस से मिलीभगत के आरोप सही पाए गए हैं. साथ ही यह भी कि उन्होंने इस मामले की जांच के दौरान एफबीआई (संघीय जांच एजेंसी) से झूठ बोला.

द न्यू यॉर्क टाइम्स के मुताबिक ट्रंप के सत्ता में आने से पहले ही फ़्लिन ने अमेरिका में रूस के तत्कालीन राजदूत सर्गेई आई किसल्यक से विदेश नीति के संबंध में बातचीत की थी. इसकी भनक लगने के बाद उन्हें तब के राष्ट्रपति बराक ओबामा के प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने चेतावनी भी दी थी. बताया जाता है फ़्लिन और किसल्यक की बातचीत ट्रंप की टीम के किसी ‘अतिवरिष्ठ सदस्य’ के निर्देश पर हुई थी. हालांकि इस सदस्य का नाम सामने नहीं आया है.

वैसे ख़बराें के मुताबिक ये ‘अतिवरिष्ठ सदस्य’ खुद डोनाल्ड ट्रंप हो सकते हैं. हालांकि मामले से जुड़े ट्रंप के एक वकील का मानना है कि ‘यह अनजान अतिवरिष्ठ सदस्य’ वर्तमान राष्ट्रपति के दामाद जे कुशनेर हैं. अलबत्ता इस तथ्य पर हर स्तर में एक-राय है कि ट्रंप इस मसले से जुड़े हर घटनाक्रम से परिचित थे. बताया जाता है कि इस ‘घालमेल’ में शामिल ट्रंप की टीम का नेतृत्व मौज़ूदा उपराष्ट्रपति माइइ पेंस कर रहे थे.

पेंस की अगुवाई वाली टीम में फ़्लिन, कुशनेर, रींस प्रीबस और केटी मैक़फरलैंड प्रमुख सदस्य थे. राष्ट्रपति बनने के बाद इन सभी को ट्रंप ने बड़े पद दिए. इनमें पेंस तो उपराष्ट्रपति हैं ही फ़्लिन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बनाए गए और प्रीबस चीफ़ ऑफ़ स्टाफ़. हालांकि बाद में विवाद के चलते फ़्लिन और प्रीबस को पद गंवाने पड़े. वहीं मशहूर टीवी कमेंटेटर मैक़फरलैंड को सिंगापुर में अगली अमेरिकी राजदूत के तौर पर मनोनीत किया जा चुका है.