उत्तर प्रदेश के नगर निकाय चुनावों में भाजपा ने दूसरी पार्टियों के मुकाबले सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है, वहीं इन नतीजों लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं. शनिवार को विपक्षी नेताओं ने मांग उठाई कि भविष्य में होने वाले सभी चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के बजाय बैलेट पेपर से कराए जाएं. यह मांग करने वालों में बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव शामिल हैं.

मायावती ने शनिवार को केंद्र और राज्य की सत्तारूढ़ भाजपा को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि उसमें साहस है तो वह 2019 का लोकसभा चुनाव बैलेट पेपर से कराए. उनका कहना था, ‘मुझे पूरा विश्वास है कि य​दि अगला लोकसभा चुनाव बैलेट पेपर से कराया जाए तो भाजपा हार जाएगी. भाजपा को यदि लगता है कि देश के मतदाता उसके साथ हैं तो उसे ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराना चाहिए.’

वहीं अखिलेश यादव ने एक ट्वीट के जरिए इन नतीजों पर सवाल उठाते हुए लिखा है, ‘जिन सीटों पर बैलेट पेपर से चुनाव हुए, भाजपा ने उनमें से केवल 15 फीसदी सीटें जीतीं. जबकि जिन पर ईवीएम से चुनाव हुए वहां भाजपा ने 46 फीसदी सफलता दर्ज की.’ समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने भी आज आरोप लगाया कि भाजपा ने नगर निगम के चुनावों में जीत हासिल करने के लिए ईवीएम का दुरुपयोग किया. उन्होंने चुनाव आयोग से मांग की है कि अब भविष्य में होने वाले सारे चुनाव ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से कराए जाएं.

इससे पहले शुक्रवार को हुई मतगणना के बाद राज्य के 16 नगर निगमों में से 14 में भाजपा जीत दर्ज करने में कामयाब हुई है. दो सीटों पर बसपा को जीत मिली, वहीं कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का खाता भी नहीं खुल सका. नगर निगम के चुनाव ईवीएम से कराए गए थे. दूसरी ओर नगरपालिका और नगर पंचायतों के अध्यक्ष और सदस्यों के चुनाव में भाजपा का प्रदर्शन बेहतर नहीं रहा. इन पदों के चुनाव बैलेट पेपर से हुए थे. चुनाव आयोग के अनुसार नगरपालिका अध्यक्ष की कुल 198 सीटों में से भाजपा को केवल 70 सीटें मिल पाई हैं. वहीं नगरपालिका सदस्य की कुल 5,261 सीटों में उसे 921 सीटों पर जीत मिली. इसके साथ ही नगर पंचायत अध्यक्ष की 438 सीटों में से भाजपा 100 सीटें पाने में कामयाब हुई है और नगर पंचायत सदस्य की 5,434 सीटों में से पार्टी को केवल 664 सीटें मिल पाई हैं.