दिल्ली स्थित मैक्स अस्पताल ने जीवित नवजात को मरा बताकर उसे घरवालों को सौंपने के मामले में दो डॉक्टरों को निकालने का फैसला किया है. अस्पताल के अधिकारियों के बीच हुई एक बैठक के बाद यह फैसला किया गया. टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक शनिवार देर रात को अस्पताल के अधिकारियों ने इसकी जानकारी दी. मैक्स अस्पताल की तरफ से जारी किए गए बयान में कहा गया है, ‘विशेषज्ञ समूह इंडियन मेडिकल असोसिएशन के सदस्यों के साथ मिलकर मामले की जांच कर रहा है. हमने दोनों डॉक्टरों एपी मेहता और विशाल गुप्ता की सेवाएं खत्म करने का फैसला किया है.’

अस्पताल का कहना है कि उच्चस्तरीय इलाज के प्रति अपनी प्रतिबद्धता के चलते यह सख्त कदम उठाया गया है. उधर, एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक मैक्स अस्पताल के खिलाफ दिल्ली पुलिस ने मामला दर्ज किया है और अस्पताल को नोटिस भेजा है. नोटिस में अस्पताल से पूरे मामले की जानकारी मांगी गई है. साथ ही अस्पताल से पूछताछ में शामिल होने को कहा है. वहीं, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भी मामले की रिपोर्ट मांगी है. एक खबर के मुताबिक दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने अस्पताल का लाइसेंस रद्द करने के संकेत दिए हैं. उन्होंने कहा कि मामले की रिपोर्ट आने के बाद सख्त कार्रवाई की जाएगी. लाइसेंस भी रद्द हो सकता है.

दूसरी तरफ बच्चे के परिजन धरने पर बैठे हुए हैं. उनकी मांग है कि अस्पताल को सील किया जाए. शालीमार बाग स्थित मैक्स अस्पताल में 30 नवंबर को दो जुड़वां बच्चे पैदा हुए थे. अस्पताल ने दोनों बच्चों को मृत घोषित कर परिवार को सौंप दिया था. उनमें एक लड़का और एक लड़की थी. बाद में पता चला कि लड़का जीवित है.