भगोड़े शराब कारोबारी और भारतीय बैंकों के 9,400 करोड़ रुपये के कर्जदार विजय माल्या को भारत प्रत्यर्पित करने के मामले की लंदन के ​वेस्टमिंस्टर कोर्ट में सोमवार को सुनवाई शुरू हो गई. इस दौरान आरोपित विजय माल्या ने कहा कि उसके खिलाफ भारत सरकार द्वारा धोखाधड़ी और मनी लॉन्डरिंग के लगाए गए आरोप झूठे, मनगढ़ंत और आधारहीन हैं. विजय माल्या अप्रैल से इन मामलों में जमानत पर चल रहे हैं.

ब्रिटेन की शाही अभियोजन सेवा (क्राउन प्रोसीक्यूशन सर्विस) के वकील मार्क समर्स मजिस्ट्रेट एम्मा अर्बटनॉट की अदालत में भारत सरकार का पक्ष रख रहे हैं. उन्होंने आज विभिन्न बैंकों द्वारा विजय माल्या को दिए गए कर्ज का ब्यौरा पेश किया. उन्होंने विजय माल्या को भारत को सौंपने की वकालत करते हुए कहा, ‘ये कर्ज माल्या की गारंटी पर उनकी कंपनी को दिए गए, लेकिन उन्होंने बैंकों को गुमराह करके इन पैसों का दुरुपयोग किया.’

इस बीच शाही अभियोजन सेवा की मदद के लिए भारत से केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रत्यर्पण निदेशालय (ईडी) की संयुक्त टीम भेजी गई है. सीबीआई के निदेशक राकेश अस्थाना खुद इसके लिए लंदन गए हैं. वैसे जानकार विजय माल्या का प्रत्यर्पण मुश्किल मान रहे हैं क्योंकि वेस्टमिंस्टर की यही अदालत पहले भी दो भारतीयों के प्रत्यर्पण की अपील ठुकरा चुकी है.