तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता के निधन को आज एक साल हो गया. और इस एक साल के भीतर उनकी पार्टी एआईएडीएमके (अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) कुछ ऐसे राजनीतिक झंझावात से गुजरी है कि उसे केंद्र में सत्ता संभाल रही भारतीय जनता पार्टी की ‘बी टीम’ कहा जाने लगा है. राज्य की राजनीति पर नज़दीकी नजर रखने वाले राजनीतिक विश्लेषकों के हवाले से अपनी एक रिपोर्ट में द हिंदू ने यह बात कही है.

जानकारों के मुताबिक एआईएडीएमके लोकसभा में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी जयललिता की नीतियों की वजह से बन सकी. वे हमेशा मानती थीं कि राज्य के हितों का संरक्षण झुककर या कमजोर दिखकर नहीं किया जा सकता. इसीलिए जब जरूरत पड़ी उन्होंने केंद्र में मौजूद सरकारों के साथ सख्त रुख़ अख़्तियार किया. राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून, कावेरी जल विवाद जैसे मसलाें पर उनका रवैया इसकी मिसाल रहा है. लेकिन पिछले साल पांच दिसंबर को उनके निधन के बाद से लगने लगा है जैसे उनकी पार्टी की राज्य सरकार ऐसे ही मसलों पर केंद्र के सामने झुककर चल रही है.

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की राज्य इकाई के सचिव जी रामकृष्णन कहते हैं, ‘एआईएडीएमके पिछले एक साल में काफी कमजोर हो चुकी है. भाजपा उसके जरिए राज्य में अपना आधार बढ़ाने और मजबूत करने की कोशिश कर रही है. पर इससे भी ज्यादा परेशान करने वाली बात राज्य के हित से जुड़े विभिन्न मसलों पर मौजूदा एआईएडीएमके सरकार का लचर रवैया है.’ उनके मुताबिक राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) पर राज्य सरकार का रुख़ इसकी सबसे बड़ी मिसाल है. हालांकि एआईएडीएमके के उपसंयोजक आर वैतिलिंगम इससे इंकार करते हैं.

वैतिलिंगम के मुताबिक, ‘हम राज्य के हितों को सुरक्षित रखने के लिए सभी प्रयास कर रहे हैं. हमने अब तक ऐसा कोई काम नहीं किया है कि जिससे राज्य के हितों को नुकसान पहुंचे. जहां तक नीट का मसला है तो हमने अपने राज्य के छात्र-छात्राओं को भी उसी तरह की सुविधाएं दिला रहे हैं जैसी अन्य राज्यों के बच्चों को मिली हुई हैं.’ मौजूदा एआईएडीएमके पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की गतिविधियों को संरक्षण देने का भी आरोप लग रहा है. जिसकी वजह से यह संगठन लगातार राज्य में सुर्ख़ियों में बना हुआ है.

लेकिन इस आरोप पर भी एआईएडीएमके के नेता कहते हैं कि लोकतंत्र में किसी संगठन को दबाया नहीं जा सकता. उसकी गतिविधियों को रोका नहीं जा सकता. आरएसएस तो राज्य में तब भी सक्रिय था और सार्वजनिक तौर पर अपने कार्यक्रम संचालित करता था जब डीएमके (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) नेता एम करुणानिधि मुख्यमंत्री हुआ करते थे. इसको अन्यथा नहीं लिया जाना चाहिए.