केंद्र सरकार ने अंतरजातीय विवाह पर आर्थिक प्रोत्साहन देने वाली योजना में पांच लाख रुपये की सालाना आय की सीमा खत्म कर दी है. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक अब किसी दलित युवक या युवती से शादी करने पर दंपति को ढाई लाख रुपये मिलेंगे चाहे उसकी सालाना आय कितनी ही हो. योजना की शर्तों के मुताबिक सरकारी मदद पाने वाले दंपति की वह पहली शादी होनी चाहिए और हिंदू विवाह अधिनियम के तहत पंजीकृत होनी चाहिए.

‘डॉक्टर अंबेडकर स्कीम फॉर सोशल इंटिग्रेशन थ्रू इंटर कास्ट मैरिज’ नाम की यह योजना 2013 में शुरू की गई थी. इसके तहत हर साल 500 अंतरजातीय जोड़ों को मदद देने का लक्ष्य रखा गया था. जिन दंपतियों की सालाना आय पांच लाख रुपये से कम है उन्हें केंद्र की तरफ से एक बार ढाई लाख रुपये की रकम बतौर प्रोत्साहन दी जानी थी.

हालांकि इस योजना का प्रदर्शन इसकी शुरुआत से ही खराब रहा है. 2014-15 में मुश्किल से पांच दंपतियों को मदद दी गई. 2015-16 में 522 दंपतियों ने आवेदन दिए, लेकिन केवल 72 को ही रकम मिल पाई. वहीं, 2016-17 में 736 आवदेनों में से केवल 45 ही मंजूर हो पाए. इस साल अभी तक 409 आवेदन आ चुके हैं और केवल 74 को ही मंजूर किया गया है. आवेदनों को कम मंजूरी मिलने को लेकर अधिकारियों का कहना है कि सभी दंपति योजना की शर्तों को पूरा नहीं करते.

सामाजिक न्याय व अधिकारिता मंत्रालय के राज्यों को दिए हालिया निर्देशों के मुताबिक योजना में दी जाने वाली आर्थिक मदद के लिए अब कोई आय सीमा नहीं होगी. मंत्रालय ने यह भी कहा कि सभी दंपतियों को अपने आधार नंबर और उससे लिंक किए गए बैंक खातों की जानकारियां देनी होंगी. मंत्रालय के एक अधिकारी ने अखबार को बताया, ‘इसी योजना के तहत कई राज्यों में आय सीमा नहीं है इसलिए केंद्र ने भी इसे हटाने का फैसला किया है.’