सुप्रीम कोर्ट ने बॉम्बे हाई कोर्ट को वरिष्ठ पत्रकार तरुण तेजपाल की याचिका पर तीन महीने में फैसला सुनाने का निर्देश दिया है. बॉम्बे हाई कोर्ट में लगाई गई अपनी याचिका में तरुण तेजपाल ने अपने ऊपर लगे बलात्कार के आरोप को रद्द करने की मांग की है. एनडीटीवी के मुताबिक शीर्ष अदालत ने गोवा की ट्रायल कोर्ट को तरुण तेजपाल के खिलाफ मामले की सुनवाई और गवाही की प्रक्रिया जारी रखने का भी निर्देश दिया है. इसके साथ सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को तरुण तेजपाल की याचिका पर बॉम्बे हाई कोर्ट का आदेश आने तक फैसला सुनाने से रोक दिया है.

तहलका पत्रिका के संस्थापक और पूर्व प्रमुख संपादक तरुण तेजपाल पर 2013 में उनकी एक महिला सहकर्मी ने गोवा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बलात्कार और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. इसके बाद उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा-376(2) (बलात्कार) और धारा-354ए (यौन उत्पीड़न) सहित पांच धाराओं में मामला दर्ज किया गया था.

इस बीच सितंबर में गोवा की जिला और सत्र अदालत ने तरुण तेजपाल के खिलाफ बलात्कार और यौन उत्पीड़न मामले में आरोप तय कर दिए थे. हालांकि, तरुण तेजपाल ने खुद को निर्दोष बताया था. इससे पहले बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा पीठ ने उनके खिलाफ आरोप तय करने की प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. अपनी याचिका में तरुण तेजपाल ने कहा था कि उनके खिलाफ सबूतों की कमी है, इसलिए आरोप तय नहीं होने चाहिए. हालांकि, अदालत ने उनकी इस दलील को नहीं माना था. हालांकि, हाईकोर्ट ने यह जरूर कहा था कि जिला अदालत आरोप तय करने के बाद गवाही की प्रक्रिया शुरू न करे.