भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा मौद्रिक नीति की समीक्षा के बारे में ज्यादातर अर्थशास्त्रियों के अनुमान सही निकले हैं. बुधवार को समीक्षा बैठक के बाद आरबीआई ने ब्याज दरों में कोई बदलाव न करने का फैसला किया. अभी रिवर्स रेपो दर 5.75 फीसदी और रेपो रेट छह फीसदी है. आरबीआई के इस फैसले से कर्ज सस्ता होने की उम्मीद करने वालों को झटका लगा है. रेपो रेट वह दर होती है जिस पर आरबीआई व्यवसायिक बैंकों को पैसे देता है. वहीं, रिवर्स रेपो रेट वह दर होती है, जिस पर व्यवसायिक बैंक अपना पैसा आरबीआई के पास जमा कराते हैं.

आरबीआई के अनुसार गवर्नर उर्जित पटेल सहित पांच लोगों ने ब्याज दरों में कोई बदलाव न करने, जबकि एक सदस्य ने ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट्स की कटौती करने का समर्थन किया. आरबीआई ने ब्याज दरों में कोई बदलाव न करने के पीछे महंगाई को नियंत्रित रखने का मकसद बताया है. केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय के अनुसार अक्टूबर में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 3.58 फीसदी तक बढ़ गया था जो सात महीने में सबसे ज्यादा था.

रॉयटर्स पोल के मुताबिक 54 में से 52 अर्थशास्त्रियों ने रेपो रेट कोई बदलाव न होने का अनुमान लगाया था. वित्तीय सेवाओं से जुड़ी वैश्विक संस्था नोमुरा ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि 2018 तक मौद्रिक नीति में कोई बदलाव नहीं आने वाला है. हालांकि, इससे पहले अक्टूबर में मौद्रिक नीति की समीक्षा के बाद आरबीआई ने रेपो और रिवर्स रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स की कटौती की थी. इसके बाद रेपो रेट 6.50 फीसदी से घटकर 6.25 फीसदी और रिवर्स रेपो रेट छह फीसदी से घटकर 5.75 फीसदी हो गया था.