आज बीसीसीआई आईपीएल के 11वें संस्करण में रिटेन किए जाने वाले खिलाड़ियों की सूची जारी करेगा. दुनियाभर के क्रिकेट प्रेमियों में इस सूची को लेकर खासी उत्सुकता है. पिछले महीने ही बीसीसीआई ने आईपीएल-11 के लिए नए सिरे से होने वाली खिलाड़ियों की नीलामी के नए नियमों की घोषणा की थी. आइये जानते हैं नए नियमों और उन खिलाड़ियों के बारे में जिन्हें आईपीएल फ्रेंचाइजीज इस सीजन में भी अपने साथ बनाये रखना चाहेंगे.

‘रिटेंशन’ और ‘राइट टू मैच’ पॉलिसी

नए नियमों में उम्मीदों के उलट आईपीएल की गवर्निंग कॉउंसिल ने फ्रेंचाइजीज को बड़ी सहूलियत दी है. इनमें ‘रिटेंशन’ और ‘राइट टू मैच’ नाम से दो नीतियां बनाई गई हैं जिनका इस्तेमाल कर फ्रेंचाइजीज अपने अधिकतम पांच खिलाड़ियों को टीम में बनाए रख सकते हैं. इससे पहले खबरें आ रही थीं कि आईपीएल-11 की नीलामी से पहले कोई भी टीम अपने केवल दो खिलाड़ियों को ही रिटेन यानी टीम में बरकरार रख पाएगी.

गवर्निंग कॉउंसिल के मुताबिक ‘रिटेंशन’ पॉलिसी का प्रयोग नीलामी से पहले, जबकि ‘राइट टू मैच’ का प्रयोग नीलामी के दौरान करना होगा. कुल पांच खिलाड़ियों को टीम में बनाए रखने के लिए इन दोनों पॉलिसीज में से किसी भी एक के जरिए अधिकतम तीन खिलाड़ियों को ही वापस लाया जा सकता है. मतलब, अगर कोई फ्रेंचाइजी तीन खिलाड़ियों को ‘रिटेंशन’ पॉलिसी के जरिये टीम में बनाए रखता है तो वह नीलामी के दौरान ‘राइट टू मैच’ पॉलिसी का इस्तेमाल कर अपने केवल दो ही खिलाड़ियों को वापस ला सकेगा. इसी तरह अगर कोई फ्रेंचाइजी ‘रिटेंशन’ पॉलिसी से दो खिलाड़ियों को टीम में बनाए रखता है तो उसे नीलामी के दौरान अपने तीन खिलाड़ियों को ‘राइट टू मैच’ पॉलिसी के जरिए वापस पाने का अधिकार होगा.

आईपीएल गवर्निंग काउंसिल ने रिटेन पॉलिसी को खिलाड़ियों की कैटेगरी में भी बांटा है. इसके तहत जिन पांच खिलाड़ियों को रिटेन करना होगा उनमें अधिकतम 3 कैप्ड भारतीय खिलाड़ी, अधिकतम 2 विदेशी खिलाड़ी और अधिकतम 2 अनकैप्ड भारतीय खिलाड़ी ही शामिल किए जा सकते हैं. कैप्ड यानी वे खिलाड़ी जो या तो वर्तमान में भारत की राष्ट्रीय टीम का हिस्सा हैं या कभी न कभी टीम का हिस्सा रह चुके हैं. इसके अलावा बचे हुए सभी भारतीय खिलाड़ी अनकैप्ड की श्रेणी में आते हैं.

आईपीएल-11 के लिए नीलामी प्रक्रिया अगले साल फरवरी में होनी है. यह खबर आने के बाद से ही एक सवाल काफी चर्चा में रहा है कि क्या दो सालों के निलंबन के बाद वापस लौट रहीं चेन्नई सुपरकिंग्स और राजस्थान रॉयल्स की टीमें भी अपने 2015 के खिलाड़ियों को रिटेन कर सकेंगी या इन टीमों को नीलामी प्रक्रिया से ही अपने सभी खिलाड़ी चुनने होंगे. इन दोनों टीमों से जुड़े इस सवाल पर भी आईपीएल गवर्निंग काउंसिल ने बुधवार की बैठक में अंतिम निर्णय ले लिया. इस निर्णय के अनुसार अब चेन्नई सुपरकिंग्स और राजस्थान रॉयल्स भी ‘रिटेंशन’ और ‘राइट टू मैच’ के जरिए आईपीएल 2015 में खेलने वाले अपने खिलाड़ियों में से पांच को वापस पा सकती हैं.

अब कौन सा खिलाड़ी कहां दिख सकता है?

इस फैसले के बाद चेन्नई सुपरकिंग्स को महेंद्र सिंह धोनी, आर अश्विन, फाफ डु प्लेसिस, सुरेश रैना, रवींद्र जडेजा, ड्वेन ब्रावो और ब्रेंडन मैकुलम जैसे अपने बेहतरीन खिलाड़ियों को वापस पाने का मौका मिल गया है. इसी तरह राजस्थान रॉयल्स के पास भी अजिंक्य रहाणे, स्टीवन स्मिथ, रजत भाटिया, जेम्स फाँक्नर और धवल कुलकर्णी जैसे खिलाड़ियों को वापस पाने का विकल्प होगा.

पिछले दिनों रॉयल चैलेंजर्स बंगलोर ने इस बात का ऐलान किया कि उन्होंने आशीष नेहरा को गेंदबाजी का कोच और गैरी कर्स्टन को बल्लेबाजी का कोच नियुक्त किया है. साथ ही खिलाड़ियों के मामले में यह टीम भारतीय टीम के कप्तान विराट कोहली, दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ी एवीडिविलयर्स और वेस्टइंडीज के क्रिस गेल पर फिर बरकरार रख सकती है. उधर, मुंबई इंडियन्स ने अपना फैसला सुना दिया है. फ्रेंचाइजी रोहित शर्मा और हार्दिक पांड्या को टीम में बनाए रखना चाहती है. वहीं हार्दिक के भाई कृणाल पांड्या को भी बरकरार रखने का फैसला किया गया है.

फ्रेंचाइजी पहले से ज्यादा पैसा खर्च कर सकेंगे

बुधवार को गवर्निंग काउंसिल की बैठक में एक और अहम फैसला लिया गया है. इसके तहत अब आईपीएल फ्रेंचाइज़ीज नीलामी में अधिकतम 80 करोड़ रुपये तक खर्च कर सकेंगे. इससे पहले तक यह रकम 66 करोड़ रुपए थी. साथ ही 2019 में यह रकम बढ़कर 82 करोड़ रुपये और 2020 में 85 करोड़ रुपये हो जाएगी. इसके अलावा नए नियमों में यह भी कहा गया है कि प्रत्येक सत्र में फ्रेंचाइजी को अपने कुल वेतन बजट की न्यूनतम 75 प्रतिशत रकम खर्च करना अनिवार्य होगा.

‘रिटेंशन’ पॉलिसी के जरिए खिलाड़ी को वापस पाने के लिए कितना पैसा खर्च करना पड़ेगा?

नए नियमों के अनुसार अगर कोई फ्रेंचाइज़ी रिटेंशन’ पॉलिसी के जरिए अपने तीन खिलाड़ियों को टीम में बनाए रखना चाहता है तो इसके लिए उसे अपने कुल बजट में से 33 करोड़ रुपए खर्च करने होंगे. उसे इनमें से एक खिलाड़ी को 15 करोड़ जबकि अन्य दो को 11 और सात करोड़ रुपए देने होंगे. इसी तरह दो खिलाड़ियों को रिटेन करने पर फ्रेंचाइज़ी के कुल बजट से 21 करोड़ रुपये कम हो जाएंगे और इस स्थिति में उसे अपने इन दोनों खिलाड़ियों में से एक को 12.5 करोड़ और दूसरे को 8.5 करोड़ रुपए चुकाने पड़ेंगे.

एक खिलाड़ी को रिटेन करने की स्थिति में फ्रेंचाइज़ी को उसे कुल 12.5 करोड़ रुपये चुकाने पड़ेंगे. हालांकि, अनकैप्ड खिलाड़ी के मामले में इस नियम में थोड़ी सी राहत दी गई है जिसके तहत प्रत्येक अनकैप्ड खिलाड़ी को रिटेन करने के लिए फ्रेंचाइज़ी को तीन करोड़ रुपए ही देने पड़ेंगे.

नीलामी के दौरान भी पैसे खर्च करने के नियमों में बदलाव

गवर्निंग काउंसिल ने नीलामी के दौरान भी पैसे खर्च करने के नियमों में बदलाव किए हैं. अभी तक नीलामी में अनकैप्ड खिलाड़ी का बेस प्राइस 10 लाख रूपए होता था लेकिन, इस बार इसे बढ़ाकर 20 लाख कर दिया गया है. इसके अलावा भी अनकैप्ड खिलाड़ियों के लिए दो अन्य श्रेणियां बनाई गई हैं जिनमें बेस प्राइस 30 और 40 लाख रखा गया है.

कैप्ड खिलाड़ियों के मामले में अलग-अलग श्रेणियों में बेस प्राइस पहले की तरह ही 2 करोड़ रुपये, 1.5 करोड़ और 1 करोड़ रखा गया है. लेकिन वे कैप्ड खिलाड़ी जिन्हें कोई फ्रेंचाइज़ी पहले नीलामी के दौरान तरजीह नहीं देता है लेकिन, नीलामी खत्म होने के बाद उनमें से किसी को चुनता है तो ऐसे खिलाड़ियों को अब उनकी श्रेणी के लिहाज से कम से कम 50 और 75 लाख रुपए देना जरूरी होगा. इससे पहले तक फ्रेंचाइज़ी को ऐसे कैप्ड खिलाड़ियों को 30 और 50 लाख रुपए ही देने पड़ते थे.

एक फ्रेंचाइजी अपने रोस्टर में कितने खिलाड़ी चुन सकता है?

प्रत्येक फ्रेंचाइजी को अधिकतम 25 खिलाड़ियों को अपने रोस्टर में चुनने की अनुमति दी गई है. इनमें विदेशी खिलाड़ियों की अधिकतम संख्या आठ हो सकती है. इससे पहले तक एक फ्रेंचाइजी अपने रोस्टर में अधिकतम नौ विदेशी खिलाड़ी और कुल 27 खिलाड़ी रख सकता था. नए नियमों में यह भी कहा गया है कि प्रत्येक फ्रेंचाइजी के रोस्टर में कम से कम 18 खिलाड़ी होना जरूरी है.