केंद्र की मोदी सरकार वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) रिटर्न से हासिल होने वाले आंकड़ों का मिलान आयकर रिटर्न के आंकड़ों से करने की योजना बना रही है. इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार का इरादा इन आंकड़ों का मिलान करके अगले वित्त वर्ष (2018-19) से कर चोरी को लगभग नामुमकिन बनाने का है. रिपोर्ट के अनुसार सरकार कंपनी और उनके प्रमोटरों की आय का डेटाबेस बनाना चाहती है जिससे इन आंकड़ों का मिलान जीएसटी रिटर्न से किया जा सके.

इस रिपोर्ट के अनुसार देश के इ​तिहास में यह पहली बार होगा जब इतने बड़े स्तर पर अप्रत्यक्ष और प्रत्यक्ष कर के आंकड़ों का मिलान किया जाएगा. जानकारों के अनुसार जीएसटी प्रणाली में शुरू से अंत तक लेन-देन का पूरा रिकॉर्ड सरकार के पास जा रहा है जिससे इसका मिलान आयकर रिटर्न से करना संभव हो गया है. इससे आय को कम करके बताने या कंपनी के खर्च को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की करदाता की मौजूदा आदत पर लगभग लगाम लग जाने की संभावना है.

रिपोर्ट के अनुसार सरकार को इस काम में नोटबंदी के दौरान मिले आंकड़ों से भी काफी मदद मिलने की संभावना है. इन सभी आंकड़ों के मिलान के लिए वह अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर और कुशल पेशेवरों की व्यवस्था कर रही है.

असल में मोदी सरकार कई प्रयासों से अगले कुछ सालों में ‘कर और जीडीपी का अनुपात’ सुधारना चाहती है. मौजूदा वित्त वर्ष में इसके 11.3 फीसदी रहने का अनुमान है जबकि चीन में अभी यह 20 फीसदी से ज्यादा है. केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि अगले कुछ साल में प्रत्यक्ष कर की मात्रा को जीडीपी के 5.6 फीसदी से बढ़ाकर 18 फीसदी कर दिया जाए. उसकी अप्रत्यक्ष कर संग्रह में भी काफी बढ़ोतरी करने की योजना है.