‘कोचों को भी सम्मानित और पुरस्कृत किए जाने की जरूरत है.’

— पुलेला गोपीचंद, भारत के राष्ट्रीय बैडमिंटन कोच

कोच पुलेला गोपीचंद का यह बयान जाने-माने बैडमिंटन खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण की बात का समर्थन करते हुए आया. कुछ दिन पहले प्रकाश पादुकोण ने भारतीय और विदेशी कोचों में अंतर किए जाने का आरोप लगाया था. उन्होंने यह भी कहा था कि पहले खेल संघों या भारतीय खेल प्राधिकरण से भारतीय कोचों को एक भी रुपया पारिश्रमिक नहीं मिलता था. इस पर पुलेला गोपीचंद ने कहा, ‘अब कोचों पर ध्यान देने की बहुत जरूरत है, क्योंकि हमें 10 साल पहले ही इस पर ध्यान देना चाहिए था, लेकिन हमने ध्यान नहीं दिया.’ उनके मुताबिक बैडमिंटन ही नहीं, बल्कि सभी खेलों के कोचों को सम्मानित और पुरस्कृत करने की जरूरत है.

‘सेना को कैसे भी राजनीति से दूर रखना चाहिए.’

— बिपिन रावत, थल सेना प्रमुख

सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत का यह बयान सेना के भीतर धर्मनिरपेक्ष माहौल होने का दावा करते हुए आया. उन्होंने कहा, ‘पिछले कुछ दिनों से हम देख रहे हैं कि सेना का राजनीतिकरण किया जा रहा है...हमारे पास एक बहुत जीवंत लोकतंत्र हैं, जिसमें सेना को राजनीति से बहुत दूर रहना चाहिए.’ जनरल बिपिन रावत ने आगे कहा कि पुराने समय में सेना के भीतर महिलाओं और राजनीति पर कोई चर्चा नहीं होती थी, लेकिन धीरे-धीरे बहस जिस तरफ जा रही है, उससे बचा जाना चाहिए. थल सेना प्रमुख के मुताबिक जब सेना देश की राजनीति में नहीं उलझती है तब ज्यादा प्रभावी होती है.


‘एक परिवार (नेहरू-गांधी) ने बाबा साहेब अंबेडकर और सरदार पटेल के साथ बहुत अन्याय किया है.’

— नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह बात गुजरात में चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कही. डॉ भीम राव अंबेडकर को 61वीं पुण्यतिथि पर याद करते हुए उन्होंने कहा, ‘जब कांग्रेस में पंडित जवाहर लाल नेहरू का हर तरफ प्रभाव था, तब डॉ अंबेडकर को संविधान सभा में ही जगह बनाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था.’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने डॉ अंबेडकर को कभी भी भारत रत्न देने के बारे में नहीं सोचा. भाजपा शासन में गुजरात की शासन-व्यवस्था सुधरने का दावा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि गुजरात के युवा कर्फ्यू जैसे शब्द को नहीं जानते हैं.


‘धर्म किसी सरकार का एजेंडा नहीं हो सकता है.’

— ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का यह बयान अपरोक्ष रूप से भाजपा को सांप्रदायिक राजनीति का दोषी ठहराते हुए आया. उन्होंने कहा, ‘एक राजनीतिक दल लगातार सांप्रदायिक राजनीति कर रहा है और देश में विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहा है.’ बाबरी मस्जिद गिराये जाने की 25वीं बरसी पर ममता बनर्जी ने कहा कि पत्रकारों की हत्या हो रही है, लोगों की पीट-पीटकर मारा जा है, यह सब कौन करवा रहा है. उन्होंने आगे कहा कि वे कौन लोग हैं जो लोगों का खान-पान तय करने की कोशिश कर रहे हैं. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने भाजपा पर बदले की राजनीति करने का आरोप लगाया और उसे विकास के मोर्च पर राजनीति करने की चुनौती दी.


‘ब्रिटिश सरकार को जलियांवाला बाग गोलीबारी (नरसंहार) के लिए माफी मांगनी चाहिए.’

— सादिक खान, लंदन के मेयर

मेयर सादिक खान का यह बयान जलियांवाला बाग को श्रृद्धांजलि देने के बाद आया. इसके बाद विजिटर्स बुक में उन्होंने लिखा, ‘बैशाखी के दिन हुए इस हादसे को हम कभी भूल नहीं सकते. हम भावनाएं यहां पर मरने वालों के साथ हैं.’ 13 अप्रैल 1919 को ब्रिगेडियर जनरल रेजिनाल्ड डायर ने रौलेट एक्ट के विरोध में आयोजित एक सभा पर गोली चलवा दी थी. स्वतंत्रता सेनानियों के मुताबिक इसमें 1000 से ज्यादा लोग मारे गए थे. ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरून ने 2013 जलियांवाला का दौरा किया था और हत्या पर शोक जताया था. हालांकि, उन्होंने इसके लिए माफी मांगने से इनकार कर दिया था.