अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जेरूसलम को इजरायल की राजधानी घोषित कर दिया है. उन्होंने अमेरिकी दूतावास को इजरायल के शहर तेल अवीव से जेरूसलम ले जाने का भी ऐलान किया है. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इस इलाके को लेकर पुरानी नीति को बदलने का वक्त आ गया है और यह इस बदलाव के तहत पहला कदम है.

इस घोषणा के साथ ही जेरूसलम को लेकर तटस्थ रहने की अमेरिका की दशकों पुरानी नीति समाप्त हो गई है. इससे मध्य पूर्व में बड़ी उथल-पुथल पैदा हो सकती है. इजरायल और फिलिस्तीन की दुश्मनी के बीच जेरूसलम की स्थिति दुनिया के सबसे विवादित मुद्दों में से एक है. दोनों ही देश इसे अपनी राजधानी होने का दावा करते हैं. यह जगह ईसाइयों, यहूदियों और मुसलमानों के लिए एक पवित्र स्थल भी है. ये सभी समुदाय जेरूसलम पर इजरायल के दावे को मान्यता नहीं देते. ऐसे में अमेरिका के इस कदम की मध्य पूर्व और दूसरे मुस्लिम बहुत देशों में बड़ी प्रतिक्रिया हो सकती है.

फिलिस्तीन ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उसने इस फैसले का विरोध करते हुए विरोध प्रदर्शनों की चेतावनी दी है. इसे पहले भी वहां के राष्ट्रपति के कार्यालय ने चेतावनी दी थी कि जेरूसलम पर फिलिस्तीन के दावे को खारिज किए जाने के विनाशकारी प्रभाव हो सकते हैं. अरब देशों के संगठन अरब लीग ने भी कहा था कि डोनाल्ड ट्रंप का यह कदम ठीक नहीं होगा.