नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (एनजीटी) ने आध्यात्मिक गुरू श्री श्री रविशंकर के संगठन ऑर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन को यमुना के डूब क्षेत्र में पर्यावरण के नुकसान के लिए जिम्मेदार ठहराया है. खबरों के मुताबिक गुरुवार को जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह फैसला सुनाया. हालांकि, एनजीटी ने इसके लिए ऑर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन पर अभी अलग से कोई जुर्माना नहीं लगाया है. ऑर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन ने पिछले साल यमुना के डूब क्षेत्र में तीन दिवसीय विश्व संस्कृति समारोह आयोजित किया था.
एनजीटी ने मार्च 2016 में आयोजित तीन दिवसीय विश्व संस्कृति समारोह से यमुना के डूब क्षेत्र में पर्यावरण को पहुंचे नुकसान के लिए ऑर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन पर पांच करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था. इसे फाउंडेशन ने 2016 में चुका दिया था. रिपोर्ट के मुताबिक अब एनजीटी ने इसी जुर्माने को यमुना के डूब क्षेत्र में पर्यावरण की भरपाई पर खर्च करने का फैसला सुनाया है. हालांकि, एनजीटी ने यह भी कहा है कि अगर इस काम का खर्च पांच करोड़ रुपये से ज्यादा हो जाता है तो उसे ऑर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन से ही वसूला जाएगा. एनजीटी ने डूब क्षेत्र में पर्यावरण की भरपाई करने की जिम्मेदारी दिल्ली विकास प्राधिकरण को सौंपी है.
एनजीटी ने इस मामले में पर्यावरण मंत्रालय सहित सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 13 नवंबर को फैसला सुरक्षित रख लिया था. सुनवाई के दौरान पर्यावरण मंत्रालय ने कहा था कि 2006 के पर्यावरण असर मूल्यांकन रिपोर्ट के मुताबिक विश्व संस्कृति समारोह आयोजित करने के लिए ऑर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन को मंजूरी की जरूरत नहीं थी. उधर, यमुना के डूब क्षेत्र में ऑर्ट ऑफ लिविंग फाउंडेशन को कार्यक्रम आयोजित करने का अधिकार था या नहीं, एनजीटी ने इस पर फैसला सुनाने से इनकार कर दिया. एनजीटी ने कहा कि यह मामला उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है.
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