रूस ने न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में भारत को शामिल करने का समर्थन करने की बात कही है. खबरों के मुताबिक रूस के उपविदेश मंत्री सेर्गेई रयाबकोव ने कहा कि रूस 15वीं आरआईसी (रूस, भारत और चीन) की विदेश मंत्रियों की बैठक में चीन से इस मुद्दे पर बात करेगा. यह बैठक 11 दिसंबर को होनी है. सेर्गेई रयाबकोव ने आगे कहा कि रूस एनएसजी और वासेनार व्यवस्था में भारत को शामिल करने का प्रबल समर्थक है. उन्होंने कहा, ‘हम चाहते हैं कि भारत इन सभी का हिस्सा बने...रूस ने हमेशा से ही भारत की एनएसजी सदस्यता के लिए काफी कोशिश की है. हम लोग सभी से बात कर रहे हैं.’

रिपोर्ट के मुताबिक रूस के उपविदेश मंत्री सेर्गेई रयाबकोव ने एनएसजी की सदस्यता के मामले में भारत की पाकिस्तान से तुलना को गलत बताया. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की तुलना में भारत की पहचान बहुत ज्यादा प्रभावशाली और बेदाग है. एनएसजी 48 देशों की संस्था है जो परमाणु हथियार बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और तकनीक के निर्यात पर निगरानी और नियंत्रण रखती है. इसमें आम सहमति से नए सदस्य को शामिल किया जाता है. भारत ने 2016 में इसकी सदस्यता के लिए आवेदन किया था. लेकिन, चीन के विरोध के चलते भारत को इसमें सफलता नहीं मिल पाई थी.

उधर, रूस के उपविदेश मंत्री सेर्गेई रयाबकोव ने यह कहा कि भारत को बहुपक्षीय तकनीकी समूह वासेनार व्यवस्था की भी सदस्यता मिल सकती है. 41 सदस्यीय वासेनार व्यवस्था की राजनीतिक समिति पारंपरिक हथियारों और दोहरे इस्तेमाल वाली सामग्री और तकनीक के निर्यात पर नियंत्रण रखती है. गुरुवार को वियना में इसकी बैठक में भारत की सदस्यता पर विचार किए जाने की संभावना है. सेर्गेई रयाबकोव ने सकारात्मक परिणाम निकलने की उम्मीद जताई है.