विदेश मंत्री सुषमा स्वराज अगले हफ्ते तीन देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में ब्रह्मपुत्र नदी के प्रदूषण का मामला चीन के सामने उठा सकती हैं. ब्रिक्स के तीन सबसे बड़े देशों रूस-भारत-चीन (आरआईसी) की विदेश मंत्रियों का यह सम्मेलन सोमवार से नई दिल्ली में होने वाला है.

डेक्कन हेराल्ड में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार सुषमा स्वराज इस सम्मेलन से इतर चीन के विदेश मंत्री वांग यी से होने वाली मुलाकात में प्रदूषण के संभावित कारणों को दूर करने की मांग करेंगी. अभी पिछले महीने अरुणाचल प्रदेश से खबर आई थी कि वहां ब्रह्मपुत्र (स्थानीय नाम-सियांग) नदी का पानी असामान्य रूप से काला पड़ गया है. अधिकारियों का दावा है कि पानी में सीमेंट से मिलती-जुलती धूल मिली हुई है जो चीन के इलाके में किसी निर्माण कार्य के चलते नदी में मिली है. स्थानीय लोगों का दावा है कि पिछले कई दशकों में नदी का पानी इतना गंदा कभी नहीं देखा गया.

इससे पहले कई मीडिया रिपोर्टों में बताया गया था कि चीन जिनजियांग के मरुस्थली इलाके में पानी ले जाने के लिए अपने इलाके में नदी की धारा मोड़ने का योजना बना रहा है. रिपोर्ट के अनुसार इसके लिए वह करीब हजार किलोमीटर लंबी सुरंग बना रहा है. अधिकारियों का अनुमान है कि उसी निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाला सीमेंट नदी को प्रदूषित कर रहा है.

ब्रह्मपुत्र तीन देशों चीन, भारत और बांग्लादेश से बहने वाली नदी है. यह चीन के तिब्बत से निकलती है ​जहां इसे जारलुंग सांग्पो कहा जाता है. हिमालय की नामचा बरवा चोटी के पास महाखड्ड और ‘यूटर्न’ लेती हुई यह अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करती है, जहां इसे सियांग के नाम से जाना जाता है. उसके बाद असम के मैदानी इलाके से होते हुए ब्रह्मपुत्र बांग्लादेश चली जाती है. वहां इसे जमुना नदी के नाम से जाना जाता है.