मुक्काबाज़ के ट्रेलर से जुड़ी बातचीत को एक मजाकिया पंच से शुरू करते हुए कहा जा सकता है कि हमारे ज्यादातर लीडर अक्सर बवंडर-ब्लंडर (घोटाले-विवाद) करने पर ही सुर्खियों में आते हैं. जैसे - बीते साल केरल में कम्युनिस्ट पार्टी के नेता और तत्कालीन खेल मंत्री ईपी विजयराजन ने अमेरिकन बॉक्सर मोहम्मद अली को केरल का बताते हुए, उनकी मौत पर अफसोस जाहिर किया था. यह भी एक तरह का ब्लंडर ही था, लेकिन यहां इसी किस्से का जिक्र इसलिए किया जा रहा है क्योंकि मुक्काबाज के ट्रेलर का पहला ही दृश्य अपने एक किरदार को ऐसी गलती करते दिखाता है. और फिर इसे यह कहकर सुधारा जाता है कि मोहम्मद अली तो केरल के थे. जाहिर है कि यह दृश्य-संवाद असली घटना पर तंज करने के लिए रखे गए हैं और बेशक बहुत ही प्रभावी हैं.

मुक्काबाज़ का ट्रेलर एक सोशल पॉलिटिकल ड्रामा की झलकियां दिखाता है, जिसका नायक एक स्पोर्ट्सपर्सन - बॉक्सर है. इस फिल्म में यह कॉम्बिनेशन देखना दिलचस्प हो सकता है क्योंकि हमारे यहां ज्यादातर स्पोर्ट्स ड्रामा फिल्मों में खेल से जुड़ी पॉलिटिक्स को कहानी में एक एक्सट्रा इनग्रेडिएंट की तरह ही इस्तेमाल किया जाता रहा है. इस बार राजनीति का खेल और खेल की राजनीति दोनों साथ-साथ देखने को मिलने वाली हैं, यह बात ट्रेलर बहुत मजबूती से कहता है. भारत के ज्यादातर इलाकों में स्पोर्ट्स का महत्व सिर्फ सरकारी नौकरी पाने तक ही सीमित है और यह फिल्म ऐसे ही कस्बाई शहर से निकले एक जुनूनी खिलाड़ी की कहानी दिखाने जा रही है, जिसकी राह का सबसे बड़ा रोड़ा सिस्टम है.

फिल्म में मुक्केबाज बनकर दिखाई दे रहे विनीत कुमार सिंह पिछले कुछ समय से अपने अभिनय के लिए सराहना तो बटोर रहे हैं, लेकिन पहचाना हुआ नाम बन पाएं, ऐसा नहीं हो पाया है. पिछले दिनों एक इंटरव्यू में उनका कहना भी था कि गैंग्स ऑफ वासेपुर सीरीज, अग्ली और इसक जैसी फिल्मों ने उन्हें नाम तो दिया, लेकिन लीड रोल नहीं दिलवा पाईं. फिलहाल उनकी यह ख्वाहिश मु्क्काबाज़ से पूरी होने जा रही है. कभी मेडिकल की पढ़ाई करने वाले विनीत के बारे में खास यह भी है कि फिल्म का आइडिया उन्हीं का है और राइटिंग क्रेडिट्स में भी उनका नाम शामिल है. फिल्म से जुड़ा एक किस्सा यह भी है कि निर्देशक अनुराग कश्यप ने विनीत से कहा था कि यह फिल्म तभी बनेगी जब वे बॉक्सिंग सीख लेंगे. इसलिए इस जुनूनी अभिनेता ने जुनूनी मुक्काबाज़ बनने के लिए पूरे एक साल तक बाकायदा बॉक्सिंग की ट्रेनिंग ली और इस दौरान जमकर मुक्के खाए.

मुक्काबाज़ से बॉलीवुड में डेब्यू कर रही ज़ोया हुसैन भी अपनी झलकियों से उत्सुकता पैदा करने में सफल होती हैं. वे फिल्म में एक गूंगी लड़की का किरदार निभाने वाली हैं और इसके लिए उन्होंने भी साइन लैंग्वेज का औपचारिक प्रशिक्षण लिया है. अब क्योंकि फिल्म में उनके हिस्से में संवाद नहीं होंगे इसलिए ज़ोया को अभिनय में ही सबसे ज्यादा जोर लगाना होगा. इन दोनों के अलावा यहां जिमी शेरगिल और रवि किशन भी देखने लायक होंगे. निर्देशक अनुराग कश्यप ने 12 जनवरी को रिलीज हो रही अपनी इस फिल्म की एक ‘दिलचस्प’ खासियत यह भी बताई है कि इसमें कोई किरदार गालियां देते हुए नहीं दिखेगा!

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