राहुल गांधी औपचारिक रूप से कांग्रेस अध्यक्ष बन चुके हैं. दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में उनकी ताजपोशी के बाद उनकी मां और करीब दो दशक तक कांग्रेस की कमान थामने वालीं सोनिया गांधी ने कहा कि उन्होंने पार्टी के सामने भविष्य की नई उम्मीद रख दी है. 132 साल पुरानी कांग्रेस की कमान थामने वाले राहुल गांधी ऐसा करने वाले नेहरू-गांधी परिवार के छठवें शख्स हैं.

किसी भी संगठन में नया मुखिया अपने हिसाब से कुछ न कुछ बदलाव करता ही है. वैसे भी अब 2019 का लोकसभा चुनाव ज्यादा दूर नहीं है, इसलिए माना जा रहा है कि राहुल गांधी अपनी टीम में कुछ फेरबदल कर सकते हैं. जानकारों की मानें तो ऐसे पांच नेता हैं जिनका राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी के भीतर कद बढ़ सकता है.

दिव्या स्पंदना

फिल्मों में दिव्या स्पंदना को रम्या के नाम से जाना जाता था. वे कांग्रेस सांसद भी रही हैं. लेकिन इसी साल 2017 में राहुल गांधी ने उन्हें कांग्रेस पार्टी की सोशल मीडिया और डिजिटल कम्युनिकेशंस का जिम्मा दिया. जिस सोशल मीडिया पर राहुल गांधी का मजाक उड़ाने वाले चुटकुले चलते थे, उसी सोशल मीडिया पर आज कांग्रेस भाजपा पर भारी पड़ रही है. कांग्रेस की सोशल मीडिया टीम से जुड़े लोग कहते हैं कि दिव्या स्पंदना अकेले नहीं आईं बल्कि उन्होंने काबिल लोगों की एक टीम बनाई और सोशल मीडिया का इस्तेमाल कांग्रेस के फायदे के लिए किया.

सोशल मीडिया पर नरेंद्र मोदी बेहद प्रभावशाली थे. लेकिन सोशल मीडिया पर कांग्रेस के बढ़ते असर का ही नतीजा था कि जब भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वडोदरा के एक भाजपा कार्यकर्ता से हुई बातचीत का टेप जारी किया तो उसमें मोदी यह कहते सुनाई दिए कि सोशल मीडिया पर सिर्फ झूठ का प्रचार होता है. छह महीने के अंदर यह बदलाव लाने वाली दिव्या स्पंदना के बारे में यह चर्चा है कि राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद उनका कद बढ़ेगा और चुनाव प्रबंधन में उनकी भूमिका भी बढ़ेगी.

अशोक गहलोत

गुजरात विधानसभा चुनावों में कांग्रेस चुनाव अभियान के प्रबंधन की अंदर की जानकारी जिसे भी हो, वह यह बता सकता है कि आज अगर गुजरात में कांग्रेस बेहद मजबूती से चुनाव लड़ते दिख रही है तो उसमें राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की बहुत बड़ी भूमिका है. एक ऐसे प्रदेश में जहां कांग्रेस एक संगठन के तौर पर बेहद जीर्ण-शीर्ण स्थिति में थी और जहां पार्टी के सबसे बड़े नेता शंकर सिंह वाघेला चुनावों के कुछ समय पहले पार्टी छोड़ गए थे, वहां कांग्रेस को मजबूती से खड़ा रखने में गहलोत ने बड़ी भूमिका निभाई है. सत्याग्रह से बातचीत में गुजरात प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता बताते हैं, ‘अशोक गहलोत ने हार्दिक पटेल, अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश मेवाणी के साथ संतुलन बैठाने से लेकर स्थानीय स्थितियों के हिसाब से टिकटों के बंटवारे और चुनावी मुद्दों के चयन तक हर मोर्चे पर बड़ी भूमिका निभाई है.’ उन्होंने आगे कहा कि अगर गुजरात में कांग्रेस का प्रदर्शन सुधरता है तो पार्टी में आंतरिक स्तर पर इसका श्रेय अशोक गहलोत को दिया जाएगा. राहुल गांधी भी खुद गुजरात चुनावों में बेहद सक्रिय हैं और गहलोत ने वहां जो भी किया है उसकी सीधी जानकारी उन्हें होगी. ऐसे में अगर कांग्रेस गुजरात में अच्छा करती है तो राहुल गांधी की टीम में गहलोत का कद बढ़ना तय माना जा रहा है.

रणदीप सुरजेवाला

राहुल गांधी ने उपाध्यक्ष के तौर पर ही रणदीप सुरजेवाला को कांग्रेस की तरफ से होने वाले संवाद का प्रमुख बना रखा है. कांग्रेस मुख्यालय से होने वाली अधिकांश प्रेस वार्ताएं सुरजेवाला करते हैं. पार्टी के दूसरे प्रवक्ता भी उन्हीं के नेतृत्व में काम करते हैं. कांग्रेस पार्टी के नेताओं का कहना है कि पिछले कुछ समय से सुरजेवाला ने जिस तरह से काम किया है, उससे राहुल गांधी बेहद प्रभावित हैं. यही वजह है कि बहुत कम समय में सुरजेवाला कांग्रेस में एक मजबूत नेता के तौर पर उभरे हैं. इस पृष्ठभूमि में यह माना जा रहा है कि राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद उनका सियासी कद और बढ़ सकता है.

शशि थरूर

शशि थरूर की गिनती पढ़े-लिखे नेताओं में होती है. मनमोहन सिंह सरकार में बतौर राज्य मंत्री काम करने वाले शशि थरूर के बारे में भी चर्चा है कि राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद उनका कद बढ़ सकता है. इस चर्चा के पीछे ठोस वजहें भी हैं. इसी साल आॅल इंडिया प्रोफेशनल कांग्रेस की शुरुआत हुई है. कांग्रेस पार्टी के सहयोगी के तौर पर काम कर रहे इस संगठन के अध्यक्ष शशि थरूर हैं. राहुल गांधी इसके चेयरमैन हैं. इस संगठन के जरिए पार्टी ने शशि थरूर को पेशेवर लोगों को कांग्रेस के साथ जोड़ने का काम दिया है. थरूर ने पिछले दिनों एक साक्षात्कार में माना था कि कुछ ही महीने में इस नए संगठन के साथ बड़ी संख्या में देश के अलग-अलग हिस्से से पेशेवर लोग जुड़ रहे हैं. कुछ दिनों पहले इस संगठन ने दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति पर एक श्वेत पत्र जारी किया. माना जा रहा है कि अब कांग्रेस जिस तरह के मुद्दे उठा रही है, उसमें अगले लोकसभा चुनावों में इस संगठन की काफी उपयोगिता रहने वाली है. इस नाते यह माना जा रहा है कि राहुल के अध्यक्ष बनने के बाद थरूर का कद और बढ़ सकता है.

ज्योतिरादित्य सिंधिया

ज्योतिरादित्य सिंधिया के राहुल गांधी से हमेशा अच्छे संबंध रहे हैं. कांग्रेस के अंदर इस बात की चर्चा है कि बतौर अध्यक्ष राहुल गांधी ज्योतिरादित्य सिंधिया को कोई बड़ी जिम्मेदारी दे सकते हैं. ऐसा इसलिए माना जा रहा है कि कांग्रेस को लंबे समय बाद अगले साल होने वाले मध्य प्रदेश चुनावों में अपनी जीत की संभावना दिख रही है. ऐसे में उसे मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुकाबला करने के लिए एक ऐसा चेहरा चाहिए जो प्रभावशाली होने के साथ-साथ स्वीकार्य भी हो.

हालांकि, वरिष्ठ कांग्रेसी नेता दिग्विजय सिंह इन दिनों एक यात्रा कर रहे हैं और उन्हें समर्थन भी मिल रहा है. इसके बावजूद दिल्ली में कांग्रेसी नेताओं का मानना है कि मध्य प्रदेश के लिए राहुल की पसंद अब ज्योतिरादित्य ही होंगे. माना जा रहा है कि अध्यक्ष बनने के कुछ समय बाद राहुल गांधी मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अरुण यादव की जगह यह जिम्मेदारी ज्योतिरादित्य सिंधिया को दे देगे. अगर ऐसा होता है तो इस बात की संभावना बढ़ जाएगी कि अगला विधानसभा चुनाव कांग्रेस ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में लड़ेगी.