अहमदाबाद के उस्मान शेख टैक्सी चलाते हैं. गुजरात विधानसभा चुनावों पर भले ही देशभर की नजरें गड़ी हों, लेकिन शेख को इनसे जुड़ी बातों में जरा भी दिलचस्पी नहीं. बीते कुछ दिनों में हम पहले भी ऐसे कई व्यक्तियों या कहें कि मुसलमानों से मिल चुके हैं जो कहते हैं कि उन्हें इन चुनावों या इनके नतीजों से कुछ खास फर्क नहीं पड़ता. हालांकि इसके पीछे उनके अपने कारण हैं जिनका जिक्र हम अगली रिपोर्ट में करेंगे, लेकिन चुनावों से निराश होने की जो वजह उस्मान भाई बताते हैं वह न सिर्फ दूसरों से काफी अलग है बल्कि कुछ हद तक चौंकाने वाली भी है. उनका कहना है, ‘जब किसी पार्टी की जीत पहले से तय है तो वोट डालने से क्या फायदा.’

शेख का इशारा ईवीएम की तरफ है. पूछने पर वे बताते हैं, ‘हर तरफ हल्ला है कि ईवीएम हैक की जा सकती है. हम जैसे लोग जो आस-पास के इलाकों से शहर में नौकरी करने आए हैं, वोट डालने जाएंगे तो एक दिन का धंधा भी मारा जाएगा और उसका कोई मतलब भी नहीं निकलेगा.’

शेख अकेले नहीं हैं जो मानते हैं कि इन चुनावों में ईवीएम को हैक किया जाएगा. गुजरात में कई लोगों को ऐसा लगता है. ये बातें शहर के उन हिस्सों में सबसे ज्यादा हो रही हैं जहां कम पढ़े-लिखे मुस्लिम या पिछड़े तबकों के लोग रहते हैं. आमतौर पर इन्हें कांग्रेस का वोटर माना जाता है.

जानकार बताते हैं कि मुश्किल समय में भी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का 150 सीटें जीतने का दावा ईवीएम से छेड़छाड़ की अफवाहों को और हवा देता है. दरियापुर के नजदीक रहने वाले अस्तलिम कहते हैं, ‘पूरे गुजरात में भाजपा विरोधी लहर है, लेकिन वे अब भी सीना ठोक कर कह रहे हैं कि हम सबसे ज्यादा सीट जीतेंगे. यह दिखाता है कि ईवीएम को हैक किया जा सकता है. पास में ही सायकल रिपेयर का काम करने वाले राजू भी गुजराती में लगभग इसी बात को दोहराते हुए कहते हैं कि जीतने वाला जीतेगा तो वोट डालने के लिए अपना टाइम खराब क्यों करना.

स्थानीय राजनैतिक विश्लेषक इस बात से इत्तेफाक रखते हैं कि ईवीएम हैक होने की खबरों के चलते गुजरात में मतदान प्रतिशत में कटौती देखने को मिल सकती है. प्रदेश के एक वरिष्ठ पत्रकार के शब्दों में ‘कम पढ़े लिखे लोगों में यह बात अंदर तक घर कर गई है कि ईवीएम से छेड़छाड़ संभव है. वे मान कर चल रहे हैं कि वोट देने से कोई फायदा नहीं.’ वे आगे कहते हैं, ‘ऐसा मानने वालों में उन लोगों की संख्या सबसे ज्यादा है जो इन चुनावों में भाजपा के विरोध में वोट डाल सकते हैं.’

सूत्रों की मानें तो शुरुआत में भाजपा ईवीएम से छेड़छाड़ के मुद्दे पर बचाव करती जरूर दिखती थी लेकिन अब अंदरखाने वह खुद इस तरह की बातों हवा दे रही है ताकी विरोधियों पर मनौवैज्ञानिक दबाब बनाया जा सके. गुजरात के चुनावों को नजदीक से देख रहे एक राजनीतिकार का इस बारे में कहना है, ‘विपक्ष को लगता है कि ईवीएम से छेड़छाड़ करने के आरोप लगाकर वह भाजपा को घेर सकता है. लेकिन जमीन पर इसका उल्टा प्रभाव देखने को मिल रहा है. इस तरह की बातों से वे लोग हतोत्साहित हैं जो इन चुनावों में सूबे की सत्ता में बदलाव देखना चाहते थे.’

इस माहौल के कांग्रेस पर पड़ने वाले प्रभाव के बारे में बात करते हुए वे बताते हैं, ‘इस बार कई सीटों पर कांटे की टक्कर होने वाली है जहां मतदाताओं के छोटे-छोटे समूह निर्णायक भूमिका निभाएंगे. यदि कांग्रेस अपने किसी भी वोटर को इन अफवाहों के चलते बूथ तक खींच पाने में नाकाम साबित हुई तो पार्टी को इसका बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.’ वे आगे जोड़ते हैं, ‘कांग्रेस को चाहिए कि वह ढुलमुल रवैया छोड़कर या तो अपने समर्थकों में यह बात गहराई तक बिठा दे कि ईवीएम से छेड़छाड़ संभव नहीं या फिर वह अपने सहयोगी दलों के साथ मिलकर किसी नए विकल्प के लिए चुनाव आयोग पर दबाव बनाए.’