छत्तीसगढ़ पुलिस जल्द ही ट्रांसजेंडरों की भी भर्ती करेगी. कॉन्स्टेबलों के रूप में भर्ती होने वाले इन ट्रांसजेंडरों को माओवादी इलाकों में भी तैनात किया जाएगा. हिंदुस्तान टाइम्स की एक खबर के मुताबिक राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के तहत पुलिस को यह कदम उठाने का निर्देश दिया है. गुरुवार को राज्य के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (भर्ती) पवन देव ने कहा, ‘अगर वे अनिवार्य लिखित परीक्षा और फिजिकल टेस्ट पास कर लेते हैं तो हम उनकी भर्ती करने के लिए तैयार हैं.’

पुलिस ने राज्य के 27 जिलों में करीब 35 हजार कॉन्स्टेबलों की भर्ती करने का प्रस्ताव रखा है. इन 27 जिलों में से 17 माओवादी हिंसा से प्रभावित हैं. पुलिस मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि चूंकि नए कॉन्स्टेबल जिला स्तर के कैडर के होंगे इसलिए संभावना है कि किसी ट्रांसजेंडर कॉन्स्टेबल को माओवादियों का भी सामना करना पड़े. पुलिस विभाग ट्रांसजेंडर आवेदकों के फिजिकल टेस्ट के लिए मानंदड तय करने को लेकर काम कर रहा है. भर्ती की प्रक्रिया देख रहे एक आईपीएस अधिकारी ने बताया कि इसके लिए विशेषज्ञों की राय ली जा रही है.

छत्तीसगढ़ में ट्रांसजेंडर समुदाय ओबीसी के तहत आता है. समुदाय के आवेदक इस आरक्षित के तहत भी अप्लाई कर सकते हैं. भारत में अभी तक केवल दो ही ट्रांसजेंडर पुलिस अधिकारियों की भर्ती हुई है. इनमें एक भर्ती तमिलनाडु और दूसरी राजस्थान में हुई. इस पर छत्तीसगढ़ पुलिस के एक अधिकारी का कहना है, ‘उनकी भर्ती कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद हुई. लेकिन हम एक प्रक्रिया के तहत उनकी भर्ती कर रहे हैं.’

2014 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रांसजेंडर समुदाय को महिला और पुरुष के अलावा तीसरे लिंग की मान्यता दी थी. कोर्ट ने कहा था कि संविधान के तहत उनके भी समान मौलिक अधिकार हैं. छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम हाशिये पर पड़े इस समुदाय को मुख्यधारा की कोशिशों में लाने के लिहाज से बहुत अहम माना जा रहा है.