आपने कहा है कि आप आम आदमी पार्टी कावर्जन टूबनाएंगे. यह क्या है?

पार्टी के ‘वर्जन वन’ में ‘ईवन’ लोग हैं, ‘वर्जन टू’ में ‘ऑड’ लोग होंगे! अऽअ... मेरे कहने का मतलब है कि ‘वर्जन टू’ में हम पार्टी को वापस अपने सही रास्ते पर लाने के लिए सभी लोगों के साथ मिलकर काम करेंगे. इसमें हम उन्हें भी शामिल करेंगे जिनकी राजनीतिक रूप से हत्या हो चुकी है या कोशिश हो रही है.

पार्टी को सही रास्ते पर लाने का क्या अर्थ है?

जहां विश्वास केन्द्र में हो!...अब्ब्ब... मेरा मतलब कि जहां लोगों में परस्पर विश्वास हो.

और राजनीतिक हत्या से आपका क्या मतलब है?

आप राजनीति हत्या के बारे में सवाल कर रही हैं, मैं आपको पूरे कत्लेआम का जवाब कविता की सिर्फ दो पंक्तियां से देना चाहूंगा; ‘निगाह उट्ठे तो सुबह हो, झुके तो शाम हो जाए / अगर तू मुस्कुरा भर दे, तो कत्लेआम हो जाए!’ (मुस्कुराते हुए)

आपने यह भी कहा है कि पार्टी में एंटी वायरस लगाए जाएंगे. पार्टी में वायरस कौन है?

देखिये झाड़ू पकड़ने वाले हाथों में कौन-से, कैसे और कितने वायरस हैं, यह पता लगाना बड़ा मुश्किल है!

अच्छा यह बताइये कि ये एंटी वायरस पार्टी में किस तरह काम करेंगे?

जैसे मैं कर रहा हूं!

आपने योगेन्द्र यादव और प्रशांत भूषण को पार्टी में वापस लाए जाने की बात भी कही है. यह कहने के पीछे आपका क्या मकसद है?

महज हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद है और क्या!...अऽअ.. मेरे कहने का अर्थ है कि पार्टी में नई संभावनाएं तो हमेशा ही हर कोई टटोलता है, पर मैं पुरानी संभावनाओं को भी टटोलने में यकीन रखता हूं.

आखिर दो साल बाद आपको उनकी याद क्यों आई?

गड़े मुर्दे उखाड़ने की कोई लास्ट डेट थोड़े ही होती है!

क्या आपको नहीं लगता कि अपने बयानों से आप पार्टी के केन्द्रीय नेतृत्व के लिए मुश्किलें खड़ी करते रहते हैं?

कवि जब मंच से बोलता है तो पूरा का पूरा जनसैलाब खड़ा हो जाता है. यहां तो सिर्फ मुश्किल ही खड़ी हो रही हैं! अब्ब्ब... मेरा मतलब है कि मैं तो सिर्फ अपनी मुश्किलें कम करके राह बनाने की कोशिश कर रहा हूं.

क्या मतलब?

मतलब बहुत साफ है. मेरे जैसे उपजाऊ बीज को अगर राजस्थान जैसी बंजर जमीन पर भी फेंका जाएगा तो मैं वहां भी उग आऊंगा! लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि मैं सिर्फ वहीं का होकर रह जाऊंगा और दिल्ली को भूल जाऊंगा! आप इन चार पंक्तियों से मेरी बात समझ जाएंगी- ‘सियासत में तेरा खोया या पाया हो नहीं सकता / तेरी शर्तों पे गायब या नुमाया हो नहीं सकता, भले साजिश में गहरे दफन कर भी दो पर मैं / सृजन का बीज हूं, मिट्टी में ज़ाया हो नहीं सकता.’

आपने पार्टी के भीतर संवाद को और बेहतर बनाने की बात कही है. आप इस तरह इशारों-इशारों में क्या कहना चाहते हैं?

देखिये, मैं इशारेबाजी नहीं करता, साफ कहता हूं. पार्टी के भीतर संवाद की इसी कमी के चलते मुझे अरविंद से अपनी बात कहने के लिए जब-तब ट्वीट करने पड़ते हैं! अऽअ...मैं सिर्फ इतना ही कहना चाहता हूं कि सोशल मीडिया का प्रयोग अच्छी बात है, लेकिन आपसी बातचीत यदि आमने-सामने ही हो जाए तो ज्यादा अच्छा है. क्योंकि ट्विटर पर जब बात आती है तो पार्टी में कम मीडिया में ज्यादा संवाद होने लगता है.

कुमार जी, इस बात में कितनी सच्चाई है कि आप राजस्थान में होकर भी पार्टी में केन्द्रीय भूमिका में रहना चाहते हैं?

देखिये बदलाव प्रकृति का नियम है. केन्द्र और हाशिये परस्पर बदलते रहते हैं. आज जो राजस्थान में है, जरूरी नहीं कि आगे भी वहीं बना रहेगा! अब्ब्ब...मेरा मतलब है संभावनाओं को कभी भी नजअंदाज़ नहीं करना चाहिए. इसे मैं अपने खास अंदाज में कुछ यूं भी कह सकता हूं; नज़र में शोख़ियां, लब पर मोहब्बत का तराना है / मेरी उम्मीद की ज़द में अभी सारा जमाना है.

आप जब तब अरविंद केजरीवाल से अलग लाइन खींचते हुए दिखते हैं और साथ ही मोदी जी की तारीफ करते रहते हैं. इस कारण आपके ऊपर भाजपा समर्थक होने के भी आरोप लगते हैं. इस पर क्या चाहेंगे?

अरे एक-आध यशवंत सिंन्हा तो हर पार्टी में होता ही है. अऽअ... मेरे कहने का मतलब यह है कि मुझसे ज्यादा तो उनका नाम अरविंद लेते हैं, लेकिन उनकी निष्ठा पर कोई सवाल खड़े नहीं करता.

लेकिन अरविंद केजरीवाल मोदी जी की तारीफ नहीं करते, बल्कि उनके विरोध में बोलते हैं.

देखिये, चाहे जिस भी तरह से अरविंद उनका नाम लेते हों, बात यह है कि उससे मोदी जी सिर्फ स्थापित ही होते हैं. जब आपको किसी को स्थापित ही करना है तो सीधे-सीधे तारीफ ही कर दो. मैं सीधा-सादा कविता लिखने वाला बंदा हूं, मुझे चीजें ज्यादा घुमानी-फिरानी नहीं आती.

हाल ही में मेरठ के एक दलित संगठनसमता सैनिक दलने आपके ऊपर बाबा साहेब अंबेडकर की छवि खराब करने का आरोप लगाकर एफआईआर दर्ज करवाई है. आप ऐसे विवाद खड़े क्यों करते हैं?

मैं बस दो पंक्तियों में इस सवाल का जवाब दूंगा...; जहां गुंजाइश हो सुनने की, वहीं संवाद करता हूं / पर जब कुछ हो नहीं पाता, तो बस विवाद करता हूं.

आप जनता के लोकप्रिय कवि हैं, फिर जब-तब जनभावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले बयान क्यों देते हैं?

आप भूल रही हैं कि मैं कवि होने के साथ-साथ नेता भी हूं. मुझे कवि और नेता दोनों की भूमिकाएं एक साथ निभानी होती हैं. जब मैं कवि सम्मेलन में होता हूं तो जनता की पसंद की कविताएं सुनाता हूं. लेकिन जैसे ही मैं नेता की भूमिका में आता हूं तो मेरी मुंह स्वतः ही जनभावनाओं को ठेस पहुंचाने का दायित्व पूरा करने लगता है...अब्ब्ब, मेरा मतलब यह है कि असली नेताओं की तरह मैं अभी भी भड़काऊ बयानबाजी कहां कर पाता हूं!

कुमार जी, गुजरात में कौन-सी पार्टी की जीत की संभावनाएं लग रही हैं आपको?

अरविंद भाई के सबसे चेहते व्यक्ति की पार्टी की.

कौन है उनका सबसे चहेता?

अरे वही, जिनके नाम का सुमिरन उन्होंने पिछले तीन सालों में सबसे ज्यादा किया है!

लेकिन योगेन्द्र यादव ने तो अपने चुनाव पूर्व सर्वेक्षण में कहा है कि भाजपा बुरी तरह हारने वाली है?

योगेन्द्र यादव आम आदमी पार्टी में अपने भविष्य का तो सर्वेक्षण सही-सही कर नहीं सके थे!...., मेरा मतलब कि जल्दी ही चुनावी नतीजे हमारे सामने होंगे.

पद्मावती फिल्म के विवाद पर क्या कहना चाहेंगे. आपके हिसाब से क्या यह फिल्म रिलीज होनी चाहिए?

आपने बहुत ही बेहतरीन सवाल किया है. ऐसे सवाल मेरे दिल के सबसे करीब होते हैं, क्योंकि उनमें विवाद की गुंजाइश होती है. मैं विवादास्पद आदमी हूं! अऽअ... मेरे कहने का तात्पर्य सिर्फ यह था कि विवादों से मेरा पुराना नाता है.

कुमार जी, मैं आपके नहीं, फिल्म पद्मावती के विवाद पर आपकी राय जानना चाहती हूं.

मैं आपकी ही मांग भरने, अब्ब्ब...मेरा मतलब पूरी करने जा रहा था. देखिये पद्मावती के गला और नाक-कान काटने की बातें करने वाले जब उनकी शहादत ही देखना चाहते हैं तो फिर फिल्म में उनका जौहर ही देख लें. मैं सिर्फ यही कहना चाहता हूं कि दो घंटे की कोई एक फिल्म राजपूतों के गौरवशाली इतिहास पर आंच नहीं ला सकती.

आपके हिसाब से राजस्थान में यह फिल्म रिलीज होनी चाहिए या नहीं?

आपके सवाल की टाइमिंग बहुत ही गलत है. आप यहां पार्टी का खाता खुलने से पहले ही उसे बंद करवाने का इंतजाम कर रही हैं. अऽअ.. मेरे कहने का अर्थ सिर्फ यह है कि अगले साल यहां विधानसभा चुनाव हैं और उस दौरान राजस्थान में झाड़ू लगाकर सफाई अभियान चलाने की जिम्मेदारी मेरी है. मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि कौन-सी फिल्म कब, कहां रिलीज होगी, यह तय करना सेंसर बोर्ड और डिस्ट्रीब्यूटरों का काम है, हमारा नहीं.

अच्छा यह बताइये कि गुजरात में आपकी पार्टी को कितनी सीटें मिलने की संभावना है?

अभी तो गुजरातियों को ही सीटें पूरी नहीं पड़ रहीं, फिर भला हम क्यों बैर मोल लें! (हंसते हुए)