किशोर कुमार का एक बेहद कर्णप्रिय गीत है, ‘कोई हमदम न रहा, कोई सहारा न रहा’ जो आज 50 साल बाद भी टाइमलेस क्लासिक कहलाता है. किशोर कुमार को वैसे भी दर्द में डूबे नगमे गाने में महारत हासिल थी और इस तथ्य को उनका यह गीत अपनी रिलीज के वक्त से लेकर आज के समय तक दोहरा रहा है. यह गीत उनके व मधुबाला के अभिनय से सजी 1961 में आई ‘झुमरू’ फिल्म का है जिसमें न सिर्फ इस गीत का फिल्मांकन उन पर हुआ था बल्कि इसका संगीत भी उन्होंने ही दिया था. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इस गीत को सबसे पहले उनके बड़े भाई अशोक कुमार ने गाया था, ‘झुमरू’ बनने के लगभग 25 साल पहले आई एक फिल्म में.

वह फिल्म थी ‘जीवन नैया’ (1936) जिसका नाम हिंदी फिल्मों के इतिहास में इसलिए अमिट है क्योंकि यह वो पहली फिल्म है जिसमें बॉम्बे टाकीज वाले हिमांशु रॉय ने अशोक कुमार को बतौर हीरो कास्ट किया था. देविका रानी इसमें उनकी हीरोइन थीं और फिल्म का संगीत उन पारसी महिला सरस्वती देवी ने दिया था जिन्हें जद्दनबाई के बाद हमारी हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की दूसरी महिला संगीतकार होने का रुतबा हासिल है.

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इस फिल्म में युवा दादा मुनि पर ही फिल्माए गए ‘कोई हमदम न रहा’ को जेएस कश्यप ने लिखा था और अशोक कुमार ने इसे केएल सहगल से मिलती-जुलती आवाज में क्लासिकल अंदाज में गाया था. 25 साल बाद किशोर कुमार ने इस गीत की धुन को पूरी तरह बदल दिया. और इस कदर कर्णप्रिय बना दिया कि सुनने वालों को सिर्फ उनका गाना याद है, अशोक कुमार का नहीं! बाद के वर्षों में लता मंगेशकर ने भी किशोर कुमार को ट्रिब्यूट देने के लिए इस गीत को गाया और किशोर के सुपुत्र अमित कुमार ने भी. लेकिन सभी ने किशोर कुमार के वर्जन को ही नई आवाज दी.

यह भी कहा जाता है कि इस गीत के अस्तित्व में आने के वक्त किशोर कुमार सिर्फ पांच वर्ष के थे लेकिन यह गाना उनके जेहन में ऐसा बसा कि जब उन्होंने फिल्मों में अभिनय करना और गीत गाना शुरू किया तो यह गाना अशोक कुमार से जबरदस्ती मांग लिया. यह कहकर कि मैं तुमसे तो इसे बेहतर ही गाऊंगा!