केंद्रीय कैबिनेट ने मुस्लिम समुदाय में प्रचलित तीन तलाक प्रथा को अपराध घोषित करने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है. समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार शुक्रवार को केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में इसे मंजूरी दी गई है. इसे अब लोकसभा और राज्यसभा में पेश किया जाएगा.

अगस्त में सुप्रीम कोर्ट भी तीन तलाक प्रथा को गैर-कानूनी और असंवैधानिक घोषित कर चुका है. हालांकि, इसके बाद इस प्रथा के जारी रहने की शिकायतों को देखते हुए मोदी सरकार ने यह कानून बनाने का फैसला किया है. इस विधेयक का मसौदा गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली एक समिति ने बनाया है. टाइम्स नाउ के मुताबिक इसमें मौखिक, लिखित, वॉट्सएप, ईमेल और एसएमएस सहित सभी तरीके से तीन तलाक देने को अपराध घोषित किया गया है. इसके लिए तीन साल की सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है.

इस विधेयक के कानून बनने के बाद तीन तलाक से पीड़ित महिलाओं को पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराने और अदालत से राहत पाने का विकल्प मिल जाएगा. केंद्रीय कैबिनेट के फैसले पर खुशी जताते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने कहा कि इससे तीन तलाक से पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को सुरक्षा मिल सकेगी.