जम्मू-कश्मीर में हिंदू अल्पसंख्यक नहीं हैं. यह राज्य की पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार का कहना है. हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट में दायर किए एक हलफनामे में राज्य सरकार ने कहा कि केंद्र सरकार की अल्पसंख्यकों की लिस्ट के मुताबिक जम्मू-कश्मीर में हिंदू अल्पसंख्यक नहीं हैं. सरकार सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई एक याचिका का जवाब दे रही थी. इस याचिका में जम्मू-कश्मीर समेत अन्य सात राज्यों में हिंदुओं को अल्पसंख्यक घोषित किए जाने की अपील की गई है. सरकार ने कहा कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होता इसलिए वह राज्य में अल्पसंख्यकों की पहचान करने के लिए बाध्य नहीं है.

सरकार ने कहा कि केंद्र की योजनाओं के लाभ केवल योग्यता और जरूरत के आधार पर दिए जाएंगे. उसके मुताबिक ये लाभ केंद्र द्वारा अधिसूचित किए गए समुदायों को दिए जाएंगे. राज्य सरकार ने केंद्र के 1993 के हलफनामे का हवाला दिया जिसमें मुसलमान, सिख, ईसाई, बौद्ध और पारसी समुदाय के लोगों को अल्पसंख्यक का दर्जा दिया गया है. 2014 में इस लिस्ट में जैन समुदाय को भी शामिल किया गया था. हलफनामे के मुताबिक लिस्ट में शामिल कोई समुदाय राज्य में बहुसंख्या में है तो बाकी बचे समुदायों के लिए सरकारी लाभ सुनिश्चित किए जाएंगे.

जम्मू-कश्मीर देश में अकेला राज्य है जहां मुस्लिम समुदाय बहुसंख्या में है, जबकि देश में हिंदुओं की आबादी करीब 80 प्रतिशत है. 2011 की जनगणना के मुताबिक राज्य में 85 लाख से ज्यादा मुसलमान हैं. यह राज्य की कुल जनसंख्या (एक करोड़ 25 लाख) का 68.31 प्रतिशत है. वहीं, हिंदुओं की जनसंख्या 35 लाख से ज्यादा है.