ठीक वैसे ही जैसे उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा जैसे राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के समय सिर्फ पंजाब में ही कांग्रेस ने जीता स्वाद चखा था. वैसे ही इस बार गुजरात और हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव में निराशाजनक नतीजों के बीच एक बार फिर कांग्रेस को पंजाब ने ही चुनावी राहत दी है. पंजाब के स्थानीय निकाय चुनाव में कांग्रेस ने शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन को तगड़ी शिकस्त दी है.

द हिंदू के मुताबिक जालंधर, अमृतसर और पटियाला के नगर निगमों को कांग्रेस ने अकाली दल-भाजपा के कब्जे से छीन लिया है. जालंधर में कांग्रेस ने 66 वॉर्डों में सफलता हासिल की. जबकि आठ पर भाजपा व चार पर अकाली दल के प्रत्याशी जीते. इसी तरह अमृतसर में 69 सीटें कांग्रेस और 12 भाजपा-अकाली दल को मिलीं. पटियाला में तो सभी 58 वॉर्डों में कांग्रेस ही जीती है. भाजपा-अकाली दल यहां खाता तक नहीं खोल सके.

न्यूज़-18 के मुताबिक तीनों नगर निगमों के कुल 189 वॉर्डों में कांग्रेस ने जीत दर्ज़ की है. इसके बाद दूसरे नंबर पर भाजपा रही. उसके प्रत्याशी कुल 14 वॉर्डों में जीते. जबकि अकाली दल के उम्मीदवारों को 11 और निर्दलीयों को 10 वॉर्डों में जीत हासिल हुई है. ख़बरों के मुताबिक तीन नगर निगमों के अलावा 29 नगरपालिका परिषदों और पूरे राज्य की नगर पंचायतों के लिए मतदान कराया गया है. उसके नतीजे अभी घोषित होने बाकी हैं.

इन नतीजों के बाद अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने राज्य निर्वाचन आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा है, ‘अकाली दल का प्रतिनिधिमंडल निर्वाचन आयोग से पांच मर्तबा मिला. उन्हें बताया कि निकाय चुनाव में धांधली हो रही है. लेकिन आयोग ने इन शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया.’ उन्होंने कहा, ‘हम अब निर्वाचन आयोग के ख़िलाफ़ उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर उसे बंद करने की मांग करेंगे.’