गुजरात के चुनावी नतीजे सबके सामने हैं. यहां कांग्रेस की सीटें बढ़ी (पहले 61 थीं इस बार 77 हो गईं) हैं. वहीं जिस भारतीय जनता पार्टी पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) से छेड़छाड़ का आरोप लगता है उसकी सीटें घटीं (2012 में 115 थीं अब 99 रह गई) हैं. तिस पर चुनाव आयोग ने यह ख़ुलासा भी किया है कि राज्य मेंं जहां भी मतदाता पर्चियों का ईवीएम की वोटिंग से मिलान किया गया हर जगह सौ फीसदी नतीजे एक से पाए गए. इसके बाद यह सवाल भी स्वाभाविक है कि क्या अब ईवीएम से छेड़छाड़ संबंधी बहस रुकेगी?

निर्वाचन आयोग के मुताबिक गुजरात चुनाव की मतगणना के दौरान सभी 182 विधानसभा सीटों पर अनिवार्य रूप से कम से कम एक मतदान केंद्र की मतदाता पर्चियों का ईवीएम की वोटिंग से मिलान किया गया है. इसके लिए मतदान केंद्र का चयन सभी पार्टियों के प्रतिनिधियों के सामने ही ‘ड्रॉ’ के जरिए किया गया. इसके नतीजे भी सबके सामने जाहिर किए गए जो कि सौ फीसदी एक जैसे थे. यानी मतदाता पर्चियों की गणना से जिस प्रत्याशी को जितने वोट मिले पाए गए उसे उतने ही वोट ईवीएम के वोटों की गिनती में भी मिले.

द टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक निर्वाचन आयोग के इस ख़ुलासे के बाद देश के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई क़ुरैशी ने कहा है, ‘इस क़वायद से ईवीएम को लेकर अनिश्चितता खत्म हो गई है. फिर भी अगर किसी को संदेह है तो वह अदालत जा सकता है.’ इसी तरह की राय टीएस कृष्णमूर्ति, एन गोपालस्वामी और एचएस ब्रह्मा जैसे पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों की भी है. पाटीदार नेता हार्दिक पटेल के ईवीएम में छेड़छाड़ संबंधी आरोपों पर गोपालस्वामी और ब्रह्मा ने तो यहां तक कहा है कि यह ‘अपने ख़राब प्रदर्शन पर कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन की सुविधाजनक बयानबाजी है.’