केंद्र ने राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद पेट्रोलियम उत्पादों को वस्तु और सेवा कर (जीएसटी) के दायरे में लाने की बात कही है. मंगलवार को राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा, ‘संसद द्वारा पारित और राज्यों द्वारा अनुमोदित संविधान संशोधन में पेट्रोलियम और पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी में शामिल रखा गया है. लेकिन जीएसटी काउंसिल के फैसले के बाद ही इस पर जीएसटी ली जा सकती है.’ उन्होंने आगे कहा, ‘पेट्रोलियम को जीएसटी के दायरे में लाने के लिए कानून में बदलाव करने की कोई जरूरत नहीं है, केवल जीएसटी काउंसिल को फैसला करना है कि कब से जीएसटी लगाना है.’

केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने कांग्रेस नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के इस सवाल का भी जवाब दिया कि सरकार इस पर अपना रुख कब तक साफ करेगी और जीएसटी काउंसिल कब फैसला लेगी. अरुण जेटली ने कहा कि यूपीए सरकार ने बड़ी ही चालाकी से पेट्रोलियम को जीएसटी के मसौदे से बाहर रखा था, क्योंकि उसे पता था कि यह राज्यों के साथ बातचीत अटका सकता है. उनके मुताबिक यह एनडीए सरकार ही थी जिसने राज्य सरकारों को इस शर्त पर राजी किया कि राज्यों के फैसले के आधार पर ही वस्तुओं को जीएसटी में शामिल किया जाएगा. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने उम्मीद जताई कि राज्यों के बीच पेट्रोलियम को जीएसटी के दायरे में लाने के लिए सहमति बन जाएगी.