पर्यावरण संरक्षण के लिए दिए गए कई ऐतिहासिक फैसलों से सुर्खियों में रहे राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के अध्यक्ष जस्टिस स्वतंत्र कुमार मंगलवार को रिटायर हो गए. एनजीटी के दूसरे अध्यक्ष बनने वाले जस्टिस स्वतंत्र कुमार सुप्रीम कोर्ट के भी जज रह चुके हैं. वे पिछले पांच साल से एनजीटी के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. 2009 में सुप्रीम कोर्ट का जज बनने से पहले जस्टिस स्वतंत्र कुमार दिल्ली, बॉम्बे एवं पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में जज रहे हैं.

हाल ही में अमरनाथ की गुफा में जयकारे लगाने और घंटे बजाने पर लगाई गई रोक एनजीटी का ही फैसला था. प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्‍ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में 10 साल पुरानी डीजल और 15 साल पुरानी पेट्रोल गाड़ियों के चलाने पर रोक लगाने का आदेश इनके कार्यकाल के दौरान ही आया था. इसके अलावा पिछले साल प्राधिकरण ने आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर की संस्था आर्ट ऑफ लिविंग को दिल्ली में यमुना के किनारे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने का दोषी करार दिया था. एनजीटी द्वारा आर्ट ऑफ लिविंग पर पांच करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था.

जस्टिस स्वतंत्र कुमार के एनजीटी का अध्यक्ष बनने से पहले इस नवनिर्मित संस्था को शायद ही कोई गंभीरता से लेता था. लेकिन पिछले पांच सालों में उनके प्रयासों से पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले लोग और औद्योगिक संस्थान भी एनजीटी से खौफ खाने लगे हैं. इस संस्था का गठन राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण अधिनियम, 2010 के तहत 18 अक्टूबर, 2010 को हुआ था. जस्टिस लोकेश्वर सिंह पंटा इसके पहले अध्यक्ष थे. वन और पर्यावरण सहित अन्य प्राकृतिक संसाधनों से संबंधित मामलों को छह महीने के अंदर निपटाने के लिए इस संस्था का गठन हुआ है, साथ ही हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट पर मुकदमों का बोझ कम करना भी इसका मकसद है.