एयरटेल पेमेंट बैंक द्वारा लोगों को बिना बताए उनके खाते खोलकर उसमें एलपीजी सब्सिडी ट्रांसफर करा लेने के मामले का खुलासा होने के बाद केंद्र सरकार अब सतर्क हो गई है. आधार बनाने वाली संस्‍था भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने मंगलवार को एक गजट अधिसूचना जारी कर बैंकों से कहा है कि वे अब सब्सिडी वाला खाता बदलने के पहले ग्राहकों से इसकी मंजूरी जरूर लेंगे.

यूआईडीएआई ने बैंकों से यह भी कहा है कि जिन ग्राहकों के पास ई-मेल या मोबाइल फोन नहीं होंगे, उनसे खाता बदलने की मंजूरी लिखित रूप में ली जाएगी. बैंक इसके बाद ही खाता बदलने का यह अनुरोध सब्सिडी जारी करने वाली संस्था भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) को भेज पाएंगे. यूआईडीएआई ने इसके अलावा बैंकों को इन सारे रिकॉर्ड को कम से कम सात साल तक सुरक्षित रखने का भी आदेश दिया है. इसके साथ ही उसने बैंकों को निर्देश दिया है कि वे सब्सिडी खाते में बदलाव की सूचना अपने ग्राहकों को 24 घंटे के भीतर एसएमएस या ईमेल से जरूर देंगे. यूआईडीएआई ने ग्राहकों को भी यह अधिकार दिया है कि यदि वे नए खाते में सब्सिडी नहीं चाहते तो वे फिर से पुराने खाते में सब्सिडी हासिल कर सकते हैं.

यूआईडीएआई द्वारा जारी ये निर्देश उन शिकायतों के बाद आए जिनमें बताया गया कि सरकार की सब्सिडी बिना लाभार्थी को बताए अपने आप उसके आधार से जुड़े आखिरी खाते में चली जा रही है. इस वजह से यदि किसी ने नया खाता खुलवाकर उसे आधार से लिंक करवाया तो बिना लाभार्थी की जानकारी के सरकारी सब्सिडी अपने आप नए खाते में जाने लगती है. पिछले हफ्ते पता चला कि एयरटेल और उसके पेमेंट बैंक ने इस कमी का गलत फायदा उठाया है.

एयरटेल के पेमेंट बैंक ने बिना लोगों से पूछे उनके नए खाते खोलकर इसमें उन्हें मिल रही सब्सिडी जमा करवा ली. नए खाते खोलने के लिए उसने मोबाइल ग्राहकों से सिम प्रमाणित करने के लिए मिले आधार का इस्तेमाल किया था. उसने इन नए खुले खातों में 190 करोड़ रु से ज्यादा राशि जमा करवा ली थी. वहीं ज्यादातर लोगों को ये भी नहीं पता चला कि उनके नाम से नए बैंक खाते खोले गए जिसमें उनकी सरकारी सब्सिडी अपने आप चली जा रही है. बाद में यूआईडीएआई ने इस हेराफेरी के लिए एयरटेल और उसके पेमेंट बैंक पर कड़ी कार्रवाई की.