केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद काम न करने वाले 176 अधिकारियों को हटाया गया है. बुधवार को कार्मिक राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में एक लिखित जवाब में यह जानकारी दी है. उन्होंने कहा, ‘एक जुलाई 2014 से 31 अक्टूबर 2017 के बीच केंद्रीय सिविल सेवा के ग्रुप ए के 53 और ग्रुप बी के 123 अधिकारियों के खिलाफ वित्तीय नियम 56(जे) और सेवा नियम के ऐसे ही प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है.’

वित्तीय नियम 56(जे) में सरकारी कर्मचारियों की सेवा की समीक्षा करने का प्रावधान है. इसके तहत पहली बार 15 साल पर, जबकि दूसरी बार 25 साल की सेवा पूरी होने पर कर्मचारियों के कामकाज की समीक्षा की जा सकती है.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक इससे पहले कार्मिक मंत्रालय ने ग्रुप ‘ए’ के 11,828 अधिकारियों के रिकॉर्ड की जांच किए जाने की जानकारी दी थी. इनमें भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) और भारतीय वन सेवा (आईएफओएस) जैसी अखिल भारतीय सेवाओं के 2,953 अधिकारी शामिल थे. मंत्रालय ने यह भी बताया था कि काम न करने और भ्रष्ट अधिकारियों को हटाने के लिए ग्रुप ‘बी’ के 19,714 अधिकारियों का रिकॉर्ड भी जांचा गया था.