हिमाचल विधानसभा चुनाव में प्रेम कुमार धूमल का हार जाना पूरे देश के लिए बड़ी खबर बनी, लेकिन भाजपा के कुछ नेता इस खबर से ज्यादा नहीं चौके. इसकी वजह की गहराई में जाने पर हैरान करने वाली बात समझ में आती है. सुनी-सुनाई से कुछ ज्यादा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को छोड़कर भाजपा के बाकी शीर्ष नेता प्रेम कुमार धूमल को मुख्यमंत्री बनते देखना नहीं चाहते थे. कहा जाता है कि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के कुछ करीबी लोगों ने पूरी कोशिश भी की थी कि प्रेम कुमार धूमल का नाम मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर घोषित न हो. लेकिन आखिरी वक्त पर धूमल ने खुद प्रधानमंत्री मोदी से बात की और आखिरी चुनाव का हवाला देकर फैसला अपने हक में करवा लिया.

जो हिमाचल की राजनीति को जानते-समझते हैं उन्हें पता है कि प्रेम कुमार धूमल और नरेंद्र मोदी की दोस्ती 20 साल से भी ज्यादा पुरानी है. 90 के दशक में हिमाचल प्रदेश मे शांता कुमार की तूती बोलती थी और प्रेम कुमार धूमल का नाम मुख्यमंत्री के तौर पर चर्चा में भी नहीं था. लेकिन जब नरेंद्र मोदी राज्य के प्रभारी बने तो उन्होंने शांता कुमार की जगह धूमल को मुख्यमंत्री बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

लेकिन इस बार सुजानपुर से हुई हार ने धूमल की सियासत पर करीब-करीब ब्रेक ही लगा दिया है. सुनी-सुनाई ही है कि कुछ महीने बाद उन्हें राज्यपाल बनाया जा सकता है और अमित शाह जिस नेता को धूमल की जगह चाहते थे जल्द ही अब वही मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने वाला है. मंडी जिले के जयराम ठाकुर अमित शाह की पहली पसंद थे. मंडी में रैली के दौरान अमित शाह ने कह भी दिया था कि चार बार विधायक और एक बार मंत्री रह चुके जयराम को अगर जनता ने चुना तो उन्हें पहले से भी ज्यादा बड़ी जिम्मेदारी मिलेगी.

जयराम के मंडी जिले में भाजपा का प्रदर्शन भी जबरदस्त रहा है. धूमल अपनी सीट हार गए जबकि मंडी में भाजपा दस में से नौ सीटें जीती और दसवां उम्मीदवार भी ऐसा निर्दलीय जीता जो भाजपा के ही साथ है. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके जयराम ठाकुर धूमल सरकार में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री थे. अब ये संयोग है ही है हिमाचल में भाजपा का प्रदर्शन तो जबरदस्त रहा लेकिन उसके ज्यादातर दिग्गज नेता हार गए. प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती, पूर्व मंत्री रवींद्र सिंह रवि, प्रेम कुमार धूमल के समधी गुलाब सिंह ठाकुर, इंदु गोस्वामी सबको हार का सामना करना पड़ा. लेकिन अमित शाह के करीबी जयराम ठाकुर शानदार तरह से जीते.

हिमाचल की खबर रखने वाले पत्रकार जानते हैं कि करीब डेढ़ दशक से हिमाचल में दो गुट सक्रिय हैं. एक गुट का नेतृत्व प्रेम कुमार धूमल और उनके बेटे अनुराग ठाकुर करते हैं और दूसरे गुट के नेता स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा हैं. अनुराग ठाकुर का गुट वित्त मंत्री अरुण जेटली का करीबी माना जाता है और जेपी नड्डा अमित शाह के बेहद निकट हैं.

दिल्ली में भाजपा की अंदर की बात बताने वाले एक सूत्र बताते हैं कि इस बार हिमाचल में भी कुछ वैसा ही हो सकता है जैसा कुछ महीने पहले गुजरात में हुआ था. वहां नितिन पटेल का मुख्यमंत्री बनना तय था, लेकिन अचानक अमित शाह के करीबी विजय रुपाणी को मुख्यमंत्री की कुर्सी मिल गई. इस बार भी प्रेम कुमार धूमल का मुख्यमंत्री बनना पक्का था, लेकिन अब अमित शाह के करीबी जयराम ठाकुर मुख्यमंत्री बन सकते हैं. धूमल के हारने के बाद खबर गर्म थी कि जेपी नड्डा को मुख्यमंत्री बनाया जा सकता है, लेकिन अब नड्डा न खुद सीएम बनना चाहते हैं न ही अमित शाह उन्हें शिमला भेजना चाहते हैं. जयराम ठाकुर नड्डा के जरिए ही अमित शाह के करीबी बने थे, इसलिए शिमला में जयराम सत्ता चलाएंगे और दिल्ली में नड्डा मंत्री बने रहेंगे.

दो साल में, दो बार, दो राज्यों में ऐसा हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के करीबी होने के बाद भी दो नेता मुख्यमंत्री बनने से चूक गए और उनकी जगह अमित शाह के करीबियों ने ले ली. नितिन पटेल के मामले में तो कहा जाता है कि खुद प्रधानमंत्री मोदी ने आनंदीबेन पटेल से वादा किया था और इस बार प्रेम कुमार धूमल को भी मोदी का ही आशीर्वाद था. लेकिन कुर्सी अमित शाह के करीबी को मिलने वाली है. कई लोग धूमल के हारने में उनके खिलाफ की गई राजनीति की भूमिका भी देखते हैं. ऐसे में जो लोग नरेंद्र मोदी और अमित शाह को जानते हैं उन्हें लगता है कि हिमाचल में आज जो हो रहा है वह आने वाले समय में उनके बीच की सहजता को कुछ और कम कर सकता है.