खाद या यूरिया पर सरकार की तरफ से मिलने वाली सब्सिडी अब सीधे किसानों के खातों में जमा की जाएगी. केंद्र के साथ मिलकर राज्य सरकारों ने इसके लिए जरूरी तैयारियां कर ली हैं. एक जनवरी 2018 से देश भर में इस योजना को लागू किया जाएगा. साथ ही यूरिया लेने के लिए किसानों को आधार कार्ड दिखाना भी जरूरी होगा.

एक अरसे से सरकार को यूरिया पर दी जाने वाली सब्सिडी में चोरी की शिकायतें मिल रही थीं. इसके मद्देनजर सरकार ने देश के 14 राज्यों के 17 जिलों में प्रयोग के तौर पर प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) की शुरुआत की थी. उत्साहजनक परिणाम हासिल होने के बाद अब इसे देश भर में लागू करने के लिए कमर कसी गई है.

रसायन और उर्वरक मंत्रालय के एक अधिकारी का कहना है कि पारदर्शिता बढ़ाने के लिए किसानों की जमीन, उनके बैंक खाते और उनकी खाद की आवश्यकता जैसी चीजों के ब्यौरे उनके आधार के साथ जोड़ने का काम भी जारी है. साथ ही यूरिया की कालाबाजारी रोकने के लिए इसकी बिक्री करने वाली दुकानों पर प्वाइंट आॅफ सेल (पीओएस) मशीनें भी लगाई जा रही हैं.

उर्वरकों का इस्तेमाल केवल किसान ही कर सकें, इसके लिए यूरिया का उत्पादन करने वाली घरेलू कंपनियों से केंद्र सरकार ने 2015 में कुल उत्पाद के 75 प्रतिशत पर नीम के तेल की कोटिंग करने को कहा था. इसका सबसे बड़ा फायदा यह हुआ कि रसायन उद्योगों ने उर्वरकों का इस्तेमाल बंद कर दिया था. साथ ही सरकार ने सब्सिडी के रूप में आवंटित किए जाने वाले हजारों करोड़ रुपये की बचत की. इसके अलावा किसानों की कृषि लागत में कमी आने से उनकी आय में वृद्धि हुई. उर्वरक का आयात घटने से विदेशी मुद्रा की बचत के अलावा नीम लेपित यूरिया ने मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में भी योगदान दिया.