शरीर में सूजन किसी अंग विशेष में आ सकती है, जैसे कि केवल पांवों में, चेहरे पर या पेट में या फिर यह सारे शरीर पर भी एक साथ आ सकती है. प्राय: शुरुआत में तो यह सूजन हल्की-हल्की ही होती है. ‘तनिक-सी पंजों पर आ जाती है... सर, वो भी केवल शाम आते-आते या जब सुबह उठता हूं तो आंखों के नीचे सूजन-सी लगती है...’ ऐसा कहने वाले कितने ही मरीज होते है जिन्हें यह सूजन काफी दिनों से थी तो परंतु उन्होंने इसे बस यूं ही मामूली बात मानकर टाल दिया.

क्या हल्की सूजन मात्र थकान, देर तक जागने, देर तक खड़े होने, खाने में कुछ आ जाने से हो जाती है? क्या ऐसे में किसी जांच की जरूरत ही नहीं? बल्कि कई बार तो ऐसे लोग भी होते हैं जो कहते हैं कि ऊपर से तो पता नहीं चल रहा सर, पर अंदर-अंदर शरीर सूजा-सा लगता है और वजन भी बढ़ गया है.

तो सूजन के कई परिदृश्य हैं. हल्की सूजन, तगड़ी सूजन, रातों-रात आ गई सूजन, धीमे-धीमे बढ़ी सूजन, कोई दवा खाने के बाद आई सूजन और इसी तरह की अन्य कोई सूजन. प्रश्न यही है कि यदि शरीर में सूजन है तो क्या यह किसी अन्य बात का संकेत हो सकता है?

हमारे शरीर में जो भी पानीनुमा तरल पदार्थ है वह या तो खून के तौर पर रक्त की नलियों में बह रहा है या फिर शरीर की कोशिकाओं के अंदर भरा हुआ है या फिर इनके बीच के पैकिंग मटीरियल में भरा है. यह तरल सामान्य स्वस्थ शरीर में इन तीनों जगहों के बीच आता-जाता रहता है. यह शरीर में लगातार प्रवाहित रहता है. और कुछ यूं प्रवाहित रहता है कि खून, प्लाज्मा, प्रोटीन तथा इस तरल पदार्थ के प्रेशर के विभिन्न बलों की खींचतान के बीच बैलेंस बना रहे तो सब ठीक रहता है वर्ना...! वर्ना यह कि यह सारा तरल कोशिकाओं और रक्त की नलियों के बाहर ही बाहर शरीर के पैकिंग मटीरियल के स्पेस में एकत्रित होने लगेगा. यही सूजन पैदा करेगा. जूते या चप्पल पहनेंगे तो उसके निशान पैरों पर रह जाएंगे. उंगली या अंगूठे से उस जगह दबाएंगे तो वहां एक गड्ढा-सा दबकर बन जाएगा. चेहरे पर सूजन आएगी तो आंखों के नीचे भरा-भरा, और ज्यादा ही सूजन आ जाए तो पूरा चेहरा ही देवताओं टाइप भरा-भरा लगने लगेगा. यदि पेट के भीतर तरल भरेगा तो पेट बढ़ जायेगा, फूला-फूला लगेगा. यह सब इसी बैलेंस के बिगड़ने का नतीजा होता है.

यह बैलेंस दिल, किडनी, लीवर, रक्त में प्रोटीन की मात्रा, रक्त नालियों में बिना रुकावट के ठीक-ठाक रक्त प्रवाह, विभिन्न हॉर्मोन्स आदि के तालमेल पर निर्भर करता है. इस कठिन से प्रतीत होते पेंचदार ज्ञान को मन में रखें और निम्न बातों का ख्याल रखें :

शरीर में कहीं भी सूजन दिखे, चाहे फिर वह कितनी भी हल्की लगे, डॉक्टर की सलाह लें. हो सकता है जांच में कुछ भी न निकले पर ऐसी स्थिति में हृदय, किडनी, लीवर आदि की जाचों में किसी बड़ी बीमारी के संकेत भी मिल सकते हैं. मैंने कितने ही केस देखे हैं जहां मामूली-सी सूजन की जांच कराने आए व्यक्ति के दोनों गुर्दे खराब निकले या उसके दिल का पंप बहुत खराब निकला.

यदि दारू का सेवन करते हों, दर्द की गोलियां नियमित खाते रहते हों, यदि पहले कभी आपको पीलिया हुआ हो, हार्ट अटैक हुआ हो, यदि दमे या बीपी की दवाइयां खाते हों, तब तो सूजन होने पर तुरंत ही अपने डॉक्टर की सलाह लें. ऐसे केसों में सूजन होने पर मरीज की पूरी जांच की आवश्यकता होती है.

यदि औरतों में केवल माहवारी के आस-पास ही सूजन आती हो, बाकी समय न रहती हो तो फिर प्राय: चिंता की कोई बात नहीं होती. जांचें तो तब भी होती हैं, परंतु ज्यादातर सब ठीक ही निकलता है. हां, महिलाओं को जरूर यह शिकायत होती है कि जब सारी जांचें ठीक हैं तो फिर मुझे यह सूजन क्यों? यह सूजन दरअसल हॉर्मोंस के कारण होती है. इसे नजरअंदाज कर दें.

यदि आप दवाइयां खाते हों (मान लें कि ब्लड प्रेशर आदि की) तो संभावना है कि दवा के कारण ही सूजन आ रही हो. ऐसी बहुत-सी दवाइयां हैं. कई बार डॉक्टर तक नहीं सोचते कि सूजन उनके द्वारा दी गई दवाई से ही हो रही है. बेहतर है कि डॉक्टर से दबी जुबान में ही सही पर पूछ जरूर लें कि यह सूजन कहीं किसी दवा के कारण ही तो नहीं है. सूजन का इलाज स्वयं न करने बैठे जाएं. नमक बंद कर दें क्या? सिकाई कर लें क्या? नमक के गुनगुने पानी में पांव डालकर बैठा करें क्या? ऐसा कुछ न करें. पहले डॉक्टर को दिखाएं. फिर वह जो भी कहें वैसा करें. सूजन किसी जानलेवा बीमारी का लक्षण भी हो सकता है इसलिए देर न करें.

गुर्दे की बीमारी की सूजन चेहरे पर, लीवर की प्राय: पेट से और दिल की बीमारी वाली सूजन पैरों से शुरू होती है. बाद में तो खैर यह बीमारी पूरे शरीर पर फैल जाती है. वैसे इस पैटर्न के अपवाद भी खूब होते हैं.

हल्की-सी सूजन भी तब जाकर शरीर पर दिखाई देती है जब बीमारी बहुत बढ़ चुकी होती है. शुरुआत में तो कई लीटर तरल शरीर में जमा होकर भी मात्र वजन ही बढ़ा सकता है, ऐसे में यदि अचानक ही पाएं कि ज्यादा भोजन लिये बिना ही वजन बढ़ रहा है तो जांचें करा लें.

हाथ, पांव, घुटनों आदि के दर्द के लिए चाहे जब दर्द की गोली न लें, इससे आपके गुर्दे तबाह हो सकते है. यदि आपको यह आदत रही है तब तो सूजन होने पर तुरंत ही जांच कराएं.

कुल संदेश यह कि शरीर में हल्की सूजन को भी नजरअंदाज न करें.