‘कौन कमबख्त बर्दाश्त करने को पीता है!’ देवदास के इस मशहूर संवाद से इतर जाएं तो बहुत से ऐसे लोग मिल जाएंगे जो ठंड बर्दाश्त करने के लिए पीने-पिलाने का सहारा लेते हैं. हालांकि शराब के ऐसे शौकीनों की कमी भी नहीं है जो ठंड के मौसम को बहाने की तरह इस्तेमाल करते हैं, फिर भी यह बात अपनी जगह बिल्कुल सही है कि एल्कोहल की थोड़ी मात्रा आपको गर्माहट का एहसास करवाती है. ठंडे इलाकों में रहने वाले लोग इस उपाय का सहारा भी लेते हैं. अब सवाल उठता है कि शराब पीने से ठंड लगना क्यों बंद हो जाती है और क्या सच में ठंड से बचने के लिए शराब का सहारा लेना अक्लमंदी कही जा सकती है?

पहले यह जान लेते हैं कि शराब पीने से गर्माहट का एहसास क्यों होता है. दरअसल एल्कोहल हमारी रक्त वाहिनियों में बह रहे खून को थोड़ा पतला कर देता है जिससे रक्त प्रवाह त्वचा के थोड़े पास से होने लगता है. यानी कि जो खून पहले थोड़ी गहराई से बह रहा होता है, वह पतला होते ही रक्तवाहिनी की सभी दीवारों को छूने लगता है. गर्म रक्त के त्वचा के पास आ जाने से त्वचा के हीट सेंसिटिव न्यूरॉन्स (थर्मोरिसेप्टर्स) सक्रिय हो जाते हैं और दिमाग को यह संदेश भेजते हैं कि अब शरीर को गर्मी मिल रही है. यही कारण है कि शराब पीने के थोड़ी देर बाद हमें गर्माहट का एहसास होता है.

अब इस सवाल पर आते हैं कि क्या बार-बार ठंड से बचने के लिए शराब का सहारा लेना समझदारी कही जा सकती है. इसका जवाब है – नहीं, क्योंकि शराब पीने के बाद हमें एहसास तो गर्मी का हो रहा होता है, लेकिन असल में हम भीतर से ठंडे हो रहे होते हैं. इसका कारण यह है कि एक तो रक्त प्रवाह का क्षेत्र बढ़ जाने से रक्त को गर्म रखने में शरीर की ज्यादा ऊष्मा खर्च हो रही होती है यानी आपका कोर बॉडी टेम्प्रेचर कम हो रहा होता है. कोर बॉडी टेम्प्रेचर शरीर का वह तापमान है जो ठंडे मौसम में शरीर का तापमान संतुलित बनाए रखने के लिए जरूरी होता है. इस तरह यह कहा जा सकता है कि शराब पीने से आपको ठंड लगनी तो कम हो जाती है, लेकिन इसके साथ-साथ धीरे-धीरे आपका शरीर ठंडा हो रहा होता है.

लगातार ऐसा करने से हाइपोथर्मिया होने का खतरा बढ़ जाता है. हाइपोथर्मिया वह मेडिकल कंडीशन है जब शरीर सामान्य से ज्यादा तेजी से हीट पैदा करता है, जिससे शरीर का भीतरी तापमान कम होता चला जाता है. इसके अलावा कुछ शोध बताते हैं कि लगातार गर्माहट के लिए शराब पीने का असर न सिर्फ कोर बॉडी टेम्प्रेचर को कम करता है बल्कि मस्तिष्क पर भी बुरा असर डालता है.