इस साल कॉलिन्स शब्दकोष में एक नया शब्द जुड़ा, फ़ेक न्यूज़. हिंदी में कहें तो फ़र्ज़ी ख़बर. भारत में फ़ेक न्यूज़ एक प्रचलित शब्द है और सोशल मीडिया इसे फैलाने का सबसे (अ)लोकप्रिय माध्यम. ये दोनों चीज़ें राजनीतिक दुष्प्रचार का प्रमुख औज़ार बन चुकी हैं जिनके ज़रिए कई बार व्यक्ति, समाज, धर्म, संस्थान, देश आदि के बारे में झूठी ख़बरें फैलाई जाती हैं. इसके लिए ग़लत तथ्यों के साथ भ्रामक और संपादित तस्वीरों या वीडियो का सहारा लिया जाता है.

सोशल मीडिया के ज़रिए किसी धर्म, समाज या देश के बारे में कुप्रचार करना लगातार चलाई जाने वाली प्रक्रिया है. वहीं, किसी व्यक्ति के बारे में किसी विशेष परिस्थिति में ग़लत जानकारियां फैलाई जाती हैं. फिर भी, कुछ हस्तियां ऐसी हैं जो हमेशा फ़ेक न्यूज़ के खिलाड़ियों की निगाह में रहती हैं. इनमें से एक देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हैं. इस साल भी वे लगातार फ़ेक न्यूज़ फैलाने वालों के सबसे बड़े निशानों में शामिल रहे. वैसे नरेंद्र मोदी के समर्थन के नाम पर अनगिनत फ़ेसबुक प्रोफ़ाइल, ट्विटर हैंडल, वॉट्सएप ग्रुप और फ़र्ज़ी न्यूज़ वेबसाइटें दूसरे नेताओं के बारे में झूठ फैलाते रहे हैं. लेकिन इस साल उन्हें बराबर की टक्कर मिलती दिखी. दूसरे नेताओं और दलों के नाम पर खोले गए फ़र्ज़ी फ़ेसबुक-ट्विटर अकाउंटों और वॉट्सएप ग्रुपों के जरिये भाजपा नेताओं के बारे में झूठ फैलाया गया, ख़ास कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर. वे पूरे साल फ़ेक न्यूज़ फैलाने वालों के पसंदीदा शिकार रहे.

1. उत्तर प्रदेश चुनाव में ‘नरेंद्र मोदी मुर्दाबाद’ के नारे

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के प्रचार अभियान के दौरान एक वीडियो वायरल हुआ. यह वीडियो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कन्नौज रैली का था जिसमें भाषण देते वक़्त प्रधानमंत्री एक व्यक्ति से कुछ कह रहे थे. वीडियो में वे कहते हैं, ‘इस सज्जन को क्या तकलीफ़ है भाई...क्या तकलीफ़ है इनको.’ दावा किया गया कि रैली में कुछ लोग ‘नरेंद्र मोदी मुर्दाबाद’ के नारे लगा रहे थे.

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लेकिन हक़ीक़त कुछ और थी. ‘नरेंद्र मोदी मुर्दाबाद’ वाला ऑडियो अलग से जोड़ा गया था. पिछले साल जनवरी में हैदराबाद यूनिवर्सिटी के छात्र रोहित वेमुला ने आत्महत्या कर ली थी. उसके बाद मचे बवाल के घेरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आ गए थे. विवाद के बीच वे लखनऊ की अंबेडकर यूनिवर्सिटी में आयोजित एक कार्यक्रम में गए थे. वे बोलने के लिए जैसे ही पोडियम पर आए, हॉल में मौजूद कुछ छात्रों ने उनके ख़िलाफ़ मुर्दाबाद का नारा लगाना शुरू कर दिया. इसी घटना का ऑडियो कन्नौज रैली वाले वीडियो में जोड़ दिया गया और प्रचारित किया गया कि उत्तर प्रदेश के लोग नरेंद्र मोदी को लोग पसंद नहीं कर रहे.

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2. ‘खाड़ी देश के ताक़तवर शेख़ के आगे नरेंद्र मोदी की औक़ात’

इस साल की शुरुआत में प्रधानमंत्री की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हुई. इसमें वे एक शेख़ के पीछे हाथ बांधे चुपचाप खड़े थे. कुछ लोगों ने तस्वीर को लेकर कहा, ‘देखो मोदी की क्या औक़ात है.’

वायरल तस्वीर
वायरल तस्वीर

कुछ लोगों ने कहा कि यह तस्वीर किसी खाड़ी देश की है जहां के एक ताक़तवर शेख़ के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौन मुद्रा में खड़े हैं. लेकिन जांच करने पर पता चला कि तस्वीर किसी खाड़ी देश की नहीं भारत की ही है और प्रधानमंत्री घर आए मेहमान के प्रति सामान्य शिष्टाचार का पालन कर रहे थे. तस्वीर दिसंबर 2015 की है जब क़तर के प्रधानमंत्री अब्दुल्ला बिन नसर बिन ख़लीफ़ा अल-थानी भारत आए थे. यहां उन्होंने दिल्ली के हैदराबाद हाउस का दौरा किया. वहां की गेस्टबुक में औपचारिक टिप्पणी लिखते हुए उनकी यह तस्वीर ली गई थी. उस समय प्रधानमंत्री मोदी उनके पीछे खड़े हुए थे.

3. प्रधानमंत्री कार्यालय की दीवार पर ‘मुकेश और नीता अंबानी की तस्वीर’

मई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर की मुलाक़ात की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. इस तस्वीर में प्रधानमंत्री कार्यालय के एक कमरे की दीवार पर मुकेश अंबानी और उनकी पत्नी नीता अंबानी की तस्वीर दिख रही थी.

वायरल तस्वीर
वायरल तस्वीर

यह बात सभी जानते हैं कि विरोधी दल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मुकेश अंबानी का क़रीबी बताते हैं, इसलिए तस्वीर पर कई लोगों ने भरोसा कर लिया और यह तेज़ी से वायरल होने लगी. लेकिन यह तस्वीर फ़ोटोशॉप या इंटरनेट के ज़रिए एडिट की गई थी. असल तस्वीर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ट्विटर हैंडल से शेयर की थी.

4. ‘मोदी ने अडानी की पत्नी को झुककर प्रणाम किया’

बतौर राजनेता नरेंद्र मोदी को उद्यमी गौतम अडानी का भी क़रीबी माना जाता है. इसी बात का फ़ायदा उठाते हुए फ़रवरी 2017 में नरेंद्र मोदी की तीन साल पुरानी तस्वीर वायरल हुई. इस तस्वीर में वे एक महिला को झुककर प्रणाम कर रहे थे. कहा गया कि देश के प्रधानमंत्री एक उद्यमी (गौतम अडानी) की पत्नी के आगे हाथ जोड़कर कौन से एहसान का बदला चुका रहे हैं.

वायरल पोस्ट
वायरल पोस्ट

तस्वीर सितंबर 2014 की थी. प्रधानमंत्री कर्नाटक के तुमकुर शहर पहुंचे थे. वहां उनका स्वागत तुमकुर की पूर्व मेयर गीता रुद्रेश ने किया था. वह जैसे ही प्रधानमंत्री के सामने आईं, प्रधानमंत्री ने उन्हें झुककर प्रणाम किया. इसे भी उनका शिष्टाचार ही कहना चाहिए. लेकिन सोशल मीडिया के खिलाड़ियों ने ग़लत जानकारी देकर उन्हें बदनाम किया.

5. ‘हसीनाओं से बाल बनवाते हैं पीएम मोदी’

सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री को बदनाम करने की कोशिश के तहत एक और तस्वीर ग़लत जानकारी के साथ शेयर की गई. इस तस्वीर में एक महिला उनके बालों के साथ कुछ कर रही थी. सोशल मीडिया पर प्रचारित किया गया कि प्रधानमंत्री ने बाल बनवाने के लिए हसीनाओं को रखा हुआ है. इसमें उनकी पत्नी जशोदाबेन मोदी को भी घसीटा गया.

लेकिन यह भी भी झूठ था. हांग-कांग स्थित मैडम तुसाद म्यूज़ियम ने 2016 में प्रधानमंत्री मोदी का मोम का पुतला बनाने का फ़ैसला किया था. म्यूज़ियम की तरफ़ से एक प्रोफ़ेशनल टीम उनके शरीर का नाप लेने आई थी. टीम की एक महिला सदस्य ने नक़ली बालों का पीएम मोदी के बालों से मिलान किया था. इस पूरी प्रक्रिया का वीडियो बनाया गया था जिसे म्यूज़ियम ने अपने यूट्यूब चैनल पर अपलोड किया था. सोशल मीडिया पर जो तस्वीर शेयर की गई वह उसी वीडियो का स्क्रीनशॉट था.

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6. नरेंद्र मोदी ने चीनी उत्पादों के ख़िलाफ़ अपील की?

2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद हर साल दीवाली के सीज़न में उनकी एक कथित अपील वायरल की जाती है. इस अपील में प्रधानमंत्री के हवाले से कहा जाता है कि नवरात्रि, दशहरा और दीवाली के सीज़न में चीनी उत्पाद न ख़रीदें.

यह झूठ है. प्रधानमंत्री ने कभी ऐसी अपील नहीं की. पिछले साल पीएमओ ने इस बारे में लोगों को सावधान भी किया था.

7. प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की ‘उपेक्षा’ की

बीती छह नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में थे. वहां उन्होंने डीएमके प्रमुख करुणानिधि से मुलाक़ात की और बाद में एक अधिकारी की बेटी की शादी में शरीक हुए. इस दौरान तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारी लाल पीएम मोदी के साथ ही रहे. शादी के एक वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी दूल्हा-दुल्हन और उनके परिवार के अन्य सदस्यों के साथ दिखाई दिए. इसी वीडियो का एक स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल किया गया. इसमें बाईं तरफ़ एक व्यक्ति को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद बताया गया और कहा गया कि नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति की उपेक्षा की. दूर से देखने में वह व्यक्ति राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद लग भी रहा था. लेकिन जांच करने पर पता चला कि वे राज्यपाल बनवारी लाल हैं जो पूरे दिन प्रधानमंत्री के साथ थे.

8. नरेंद्र मोदी जब ‘चाय बेचते थे’ तब वडनगर में कोई रेलवे स्टेशन नहीं था

नरेंद्र मोदी के बारे में सबसे लोकप्रिय तथ्य कोई है तो यह कि वे बचपन में वडनगर स्टेशन पर चाय बेचते थे. इसी को लेकर इस साल एक सवाल सोशल मीडिया पर ज़बरदस्त वायरल हुआ. सवाल के बहाने यह साबित करने की कोशिश की गई कि मोदी का चाय बेचने का दावा झूठा है. सवाल कुछ यूं था, ‘तुम्हारा (नरेंद्र मोदी) जन्म 1950 में हुआ और वडनगर में 1973 में ट्रेन चली. तब तुम 23 साल के थे. 20 की उम्र में तुमने घर छोड़ दिया तो चाय कब बेचते थे?’

इस सवाल ने लोगों का ध्यान खींचा और उन्होंने इसे ख़ूब शेयर किया. गूगल करने पर पता चला कि सवाल में सही तथ्य पेश नहीं किया गया था. वडनगर में 1973 से बहुत पहले ट्रेनों की आवाजाही शुरू हो चुकी थी. अंग्रेज़ी शासन के दौरान व्यापार के लिए गुजरात के कई ज़िलों में रेलवे लाइन बिछाई गई थी. इनमें मेहसाणा भी शामिल था. वडनगर इसी ज़िले में पड़ता है.

9. मुख्यमंत्री रहते नरेंद्र मोदी अपने गृह नगर का स्कूल तक नहीं सुधार पाए

अक्टूबर के आसपास आम आदमी पार्टी (आप) और भाजपा समर्थकों के बीच शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक-दूसरे के ख़िलाफ़ भ्रामक दावे करने की ‘जंग’ चली. आप पार्टी के समर्थकों ने प्रधानमंत्री की एक तस्वीर शेयर की. इस तस्वीर में मोदी एक सरकारी स्कूल में बच्चों के बीच दिखाई दे रहे थे. स्कूल की हालत ख़राब थी जिसे लेकर आप समर्थकों ने तंज़ कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 12 साल तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और इस दौरान अपने ही स्कूल की हालत सुधार नहीं पाए. यह तस्वीर उस समय वायरल की गई जब प्रधानमंत्री ने अपने गांव वडनगर का दौरा किया था. दावा किया गया कि तस्वीर उसी समय की है.

लेकिन जानकारी भ्रामक साबित हुई. गूगल करने पर 17 दिसंबर, 2010 का एक ब्लॉग मिला जिसमें बताया गया था कि यह तस्वीर गुजरात के कनिजवांता नाम के गांव की है जो खेड़ा ज़िले में आता है, जबकि नरेंद्र मोदी का गांव वडनगर मेहसाणा ज़िले में पड़ता है.

10. मोदी ने भारत में जन्म लेने को ‘पिछले जन्म का पाप’ बताया

सितंबर में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी (उस समय उपाध्यक्ष थे) अमेरिका गए थे. वहां एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि भारत में वंशवाद कई क्षेत्रों में है, इसलिए केवल उन्हीं की बात न की जाए. उनके बयान को लेकर भाजपा और एक अन्य वर्ग के लोगों ने कहा कि राहुल गांधी ने देश का अपमान किया है. इसके जवाब में कांग्रेस समर्थकों ने नरेंद्र मोदी का एक पुराना आधा-अधूरा वीडियो वायरल कर यह साबित करने की कोशिश की कि देश का अपमान राहुल गांधी ने नहीं नरेंद्र मोदी ने किया था. इस वीडियो में नरेंद्र मोदी भारत में जन्म लेने को पिछले जन्म का पाप बताते दिखते हैं.

यह वीडियो प्रधानमंत्री के 2015 में दिए एक भाषण का छोटा सा हिस्सा था. इसी को लेकर शंका थी, क्योंकि सोशल मीडिया पर अक्सर आधे-अधूरे तथ्यों को वायरल किया जाता है. इसलिए हमने पूरा वीडियो ढूंढा और सुना. पता चला कि नरेंद्र मोदी भारत की ‘बदलती व्यापारिक परिस्थिति’ और उसके बारे में लोगों की ‘बदलती’ राय पर बोल रहे थे. देश का अपमान करने वाली बात ग़लत साबित हुई.

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