भाजपा गुजरात चुनाव हारते-हारते जीत गई. भाजपा के बड़े-बड़े नेता आपसी बातचीत में कहते सुने जाते हैं कि इस बार भाजपा को सैकड़ा लगाने से पाटीदारों ने नहीं, जातियों के गठजोड़ ने रोका था. गुजरात चुनाव जीतने के बाद प्रधानमंत्री ने कहा था, जातिवाद का ज़हर फैलाया गया. भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से भी जब पूछा गया तो उन्होंने हिसाब जोड़कर समझाया कि कांग्रेस ने किस तरह से जाति का कार्ड खेला.

लेकिन विजय रूपाणी मंत्रिमंडल पर एक नजर डालें तो समझ में आता है कि इस पर भी वही जातिवाद हावी है जिसकी शिकायत नरेंद्र मोदी और अमित शाह कर रहे थे. 18 राज्यों के मुख्यमंत्रियों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने जिस मंत्रिमंडल ने गांधीनगर में शपथ ली उसमें काबिलियत से ज्यादा जात-पांत का हिसाब नजर आता है. जिन 19 मंत्रियों को गुजरात में मंत्री बनाया गया है उनमें छह पाटीदार समुदाय से आते हैं और पांच पिछड़ा वर्ग से. बाकी के मंत्रियों में तीन आदिवासी समुदाय के हैं और तीन क्षत्रिय. इसके अलावा एक मंत्री दलित समुदाय से है और एक ब्राह्मण समुदाय से.

अगर बात मुख्यमंत्री से ही शुरू करें तो विजय रुपाणी जैन हैं. सियासी भाषा में उन्हें ‘कास्ट न्यूट्रल’ कहा जाता है. यानी सरकार का मुखिया एक ऐसा नेता है जो किसी भी जाति का नहीं माना जा सकता. इसलिए शुरू से ही विजय रुपाणी खुद को सीएम यानि ‘कॉमन मैन’ कहकर बुलाते रहे हैं. लेकिन उनके उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल कड़वा पाटीदार हैं. वे हार्दिक पटेल के आंदोलन का केंद्र कहे जाने वाले महेसाणा से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं.

विजय रुपाणी मंत्रिमंडल में तीसरे नंबर की हैसियत रखने वाले आरसी फलदू जामनगर के विधायक हैं और इनका ताल्लुक लेउवा पटेल समाज से है. मुश्किल वक्त में लेउवा पटेल ने भाजपा का साथ दिया और सौराष्ट्र से आरसी फलदू जीते. इसलिए वे उन छह पटेल नेताओं में शामिल हैं जिन्हें विजय रुपाणी की टीम में शामिल किया गया है.

रुपाणी सरकार में भूपेंद्र सिंह चूडास्मा क्षत्रिय राजपूत नेता हैं. अहमदाबाद की धोलका सीट से वे पांचवीं बार विधायक बने हैं. ठाकोर राजपूतों का वोट कांग्रेस की तरफ खिसका है लेकिन क्षत्रिय राजपूत भाजपा के साथ रुके रहे. इसलिए चूडास्मा को रुपाणी मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री बनाया गया है. उधर दिलीप ठाकोर को मंत्री बनाकर भाजपा ने ठाकोर समाज को भी वापस अपनी ओर खींचने की कोशिश की है. इसके अलावा राजपूत समुदाय से आने वाले प्रदीप जडेजा को भी रूपाणी सरकार में राज्यमंत्री बनाया गया है.

विजय रूपाणी मंत्रिमंडल में गणपत वसावा को भी कैबिनेट मंत्री बनाया गया है. चर्चा तो उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाने की भी थी. आदिवासी वोट बैंक में कांग्रेस ने इस बार जबरदस्त सेंध लगाई है. इसलिए उन सहित तीन आदिवासी नेताओं को मंत्री बनाकर भाजपा ने आदिवासी वोटों को अपने पास रखने की कोशिश की है.

भाजपा के पास गुजरात में दलित नेताओं का अकाल है. ऊपर से यह भी माना जा रहा है कि जिग्नेश मेवाणी ने उसे इस बार काफी नुकसान पहुंचाया है. इस स्थिति से निपटने के लिए गुजरात में ईश्वर परमार को पहली बार में ही कैबिनेट मंत्री बना दिया गया है. भाजपा का मानना है कि पटेल समुदाय तो ज्यादा दिन उससे अलग नहीं रह सकता लेकिन दलित समाज के साथ उसका रिश्ता अब तक बिखरा-बिखरा सा है.

2017 के मुश्किल चुनाव में गुजरात में कोली वोटरों का साथ भाजपा को मिला.यहां की करीब 20 सीटें ऐसी हैं जहां कोली समाज ही जीत और हार तय करता है.लेकिन इस समाज के नेताओं को अब तक सही प्रतिनिधित्व नहीं मिलता था. इस बार भाजपा ने गांव-गांव में यह प्रचारित किया कि देश के राष्ट्रपति भी कोली समाज के हैं और गुजरात में मंत्री भी कोली समाज के होंगे. भाजपा की यह रणनीति सही बैठी. ऐसे में उसने कोली समाज के दो नेताओं को राज्यमंत्री का दर्जा दिया है - पुरुषोत्तम भाई सोलंकी और बचुभाई खाबड़.

इस बार भाजपा ने पटेल वोटों के नुकसान की भरपाई पिछड़े वोटों से करने की कोशिश की थी. इसी के नतीजे में उसने इस वर्ग से आने वाले पांच लोगों को गुजरात सरकार में मंत्री बनाया है.